रायबरेली नामांतरण मामले में 8 साल की देरी, हाई कोर्ट ने बार एसोसिएशन और नायब तहसीलदार को फटकारा
लखनऊ हाई कोर्ट ने रायबरेली के सलोन तहसील में आठ साल से अधिक समय से लंबित नामांतरण वाद पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बार एसोसिएशन को पक्षकार बनाने और नायब तहसीलदार से देरी का कारण बताने के लिए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विधि संवाददाता, NOI, लखनऊ। रायबरेली की तहसील सलोन में नामांतरण का एक वाद आठ वर्ष से अधिक समय से लंबित रहने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। 18 जुलाई 2018 को शुरू हुआ यह वाद 24 अगस्त 2026 तक करीब 190 तारीखों पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ, लेकिन अंतिम आदेश नहीं हो सका।
कोर्ट ने बार एसोसिएशन, तहसील सलोन को आवश्यक पक्षकार बनाकर अगली सुनवाई पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने रेशमा व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।
190 तारीखों के बाद भी नामांतरण वाद लंबित
याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2018 से लंबित नामांतरण वाद का शीघ्र निस्तारण कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 के तहत दाखिल वाद में अब तक अंतिम आदेश नहीं हुआ। कोर्ट ने ऑर्डरशीट का अवलोकन किया तो पाया कि 18 जुलाई 2018 से 24 अगस्त 2026 के बीच करीब 190 बार सुनवाई के लिए तारीख लगी। इनमें 26 अवसरों पर पीठासीन अधिकारी के प्रशासनिक कार्य, 16 अवसरों पर कोविड-19 महामारी और 127 अवसरों पर बार एसोसिएशन के अनुरोध पर स्थगन हुआ।
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