NOI संवाददाता, कानपुर। दवा कारोबारी ससुर की हत्या की साजिश रचने वाली बहू शालू की जेल में पहली रात बेहद बेचैनी और करवट बदलते बीती। 24 घंटे एसी समेत सुख-सुविधाओं की आदी रही शालू को सोमवार शाम जेल पहुंचने के बाद महिला बैरक में सामान्य बंदियों के बीच रखा गया। इस दौरान वह गर्मी से बेचैन रही उसने किसी से बात नहीं की और न ही खाना खाया। इस दौरान महिला बंदियों ने उससे जेल आने की वजह पूछा तो रोती रही।

मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे उसे अन्य बंदियों की तरह जगाया गया। सुबह उसने नाश्ते में दलिया और गुड़ खाया। दोपहर में दाल, चावल और रोटी-सब्जी दी गई। दोपहर में महिला बंदियों ने उससे परिवार और बच्चों के बारे में पूछा तो वह अपने पांच वर्षीय बेटे श्रीजय को याद करके रोने लगी इस पर महिला बंदियों ने उसे शांत कराया इसके बाद वह सिसकते हुए दो-तीन घंटे बाद सो गई।

शाम को चाय-बिस्किट लेने के बाद रात में दाल-सब्जी और रोटी खाई। जेल अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि शालू को सामान्य बंदियों की तरह ही महिला बैरक अन्य बंदियों के बीच रखा गया है। जेल आने पर वह कुछ घंटों तक बेचैन रही, लेकिन फिर सामान्य हो गई थी। वह सामान्य बंदियों की तरह ही दोनों समय खाना व नाश्ता ले रही है। हालांकि वह गुमसुम रहती है और बंदियों से बहुत कम बात करती है अक्सर बेटे को याद करके रोने लगती है।

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