डार्क वेब के जरिये देशभर में साथियों के संपर्क में था रमीज, केजीएमयू मतांतरण में डाटा खंगाल रही एसटीएफ
केजीएमयू मतांतरण मामले में आरोपी रमीजुद्दीन डार्क वेब के जरिए देशभर में अपने साथियों से जुड़ा था, जहां वह महिलाओं को फंसाने के तरीके बताता था। एसटीएफ अब उसके लैपटॉप डेटा की जांच कर रही है ताकि उसके नेटवर्क और गतिविधियों का पता चल सके।
NOI संवाददाता, लखनऊ। केजीएमयू में मतांतरण, लव जिहाद और महिला डाक्टर के यौन शोषण के आरोपों की जांच में एसटीएफ को नई जानकारियां मिली हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपित रमीजुद्दीन डार्क वेब की मदद से देशभर में अपने साथियों के संपर्क में रहता था। वह सिर्फ बातचीत ही नहीं करता था, बल्कि उन्हें टास्क देने के साथ महिलाओं को अपने जाल में फंसाने के नए-नए तरीके भी बताता था।
एसटीएफ अब उसके लैपटाप का पूरा ब्योरा जुटाकर डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। आशंका है कि लैपटाप से उसके नेटवर्क, संपर्कों और गतिविधियों से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, रमीजुद्दीन का नेटवर्क केवल लखनऊ तक सीमित नहीं था। वह डार्क वेब के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय लोगों से संपर्क बनाए रखता था।
रोजाना नए तरीके साझा कर साथियों को बताता था कि किस तरह महिलाओं को विश्वास में लेकर उन्हें अपने प्रभाव में लाना है। साथियों को दिए जाने वाले टास्क और उनके बीच होने वाले संवाद की जानकारी जुटाने के लिए एसटीएफ डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है। एसटीएफ ने रमीजुद्दीन के लैपटाप का ब्योरा जुटाया है। अब उसमें मौजूद डिजिटल डाटा, संपर्कों और अन्य तकनीकी जानकारियों को जांच में शामिल करने की तैयारी है।
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि डार्क वेब के जरिये किन लोगों से संपर्क किया जाता था, उन्हें क्या जिम्मेदारियां दी जाती थीं और इस नेटवर्क में कौन-कौन सक्रिय था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपित के संपर्क देश के दूसरे शहरों में कितने लोगों से थे। बता दें कि दिसंबर 2025 में केजीएमयू की एक महिला डाक्टर ने रमीजुद्दीन के खिलाफ मतांतरण के लिए दबाव बनाने, प्रताड़ना और दुष्कर्म समेत अन्य गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था।
इसके बाद मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही एजेंसी अन्य डाक्टरों, कर्मचारियों और कथित मददगारों की भूमिका भी खंगाल रही है। अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश है कि रमीजुद्दीन का नेटवर्क किस स्तर तक फैला था और इसमें उसकी मदद कौन-कौन कर रहा था।
यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
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