प्रयागराज में जमीन के नीचे दबे ड्रमों से 3.20 करोड़ रुपये मिलने के मामले में आयकर विभाग ने जांच तेज कर दी है।

NOI  ब्यूरो, लखनऊ। जमीन के नीचे दबे तीन ड्रम, उनमें भरे पांच-पांच सौ रुपये के नोट और कुल 3.20 करोड़ 93 हजार रुपये की नकदी। प्रयागराज में बरामद इस रकम की गिनती भले पूरी हो गई हो, लेकिन इसका स्रोत अब भी रहस्य बना हुआ है। करोड़ों रुपये आखिर आए कहां से, किसके थे और उन्हें जमीन के नीचे छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी?

इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए आयकर विभाग ने अब जांच की अगली कड़ी जोड़नी शुरू कर दी है। जांच का सिरा प्रयागराज के राकेश यादव के घर से निकलकर पुणे तक पहुंच गया है। जांच का दायरा राकेश यादव उर्फ महाकाल तक ही नहीं उसके भाई राजेश यादव उर्फ बबलू पर भी है। दोनों के सेठ से संबंधों की पड़ताल की जा सकती है।

पूछताछ में राकेश यादव ने बताया कि वह पुणे में एक सेठ के यहां निजी ड्राइवर के रूप में काम करता था। कोविड के दौरान पुणे से लौटकर प्रयागराज आ गए थे। अब आयकर विभाग यह जानने की कोशिश करेगा कि पुणे जाने से पहले आर्थिक स्थिति क्या थी, उनके पास कितनी संपत्ति थी और बैंक खातों में कितना लेनदेन होता था।

जमीनों और अन्य संपत्तियों का ब्योरा

पुणे में नौकरी के दौरान मिलने वाले वेतन और दूसरी आमदनी का हिसाब भी जुटाया जा सकता है। इसके बाद प्रयागराज लौटने पर खरीदी गई जमीनों और अन्य संपत्तियों का ब्योरा मिलाया जाएगा। इस तुलना से पता चल सकेगा कि उनकी संपत्ति में कोई बड़ा बदलाव हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो उसके पीछे आय का कौन सा स्रोत था।

जांच का अहम सवाल यह भी है कि सेठ के यहां काम करने वाले व्यक्ति के पास इतनी बड़ी नकदी पहुंची कैसे? क्या कोविड के दौरान सेठ के यहां कोई ऐसी अनहोनी हुई थी, जिसके बाद रकम वहां से हटाई गई? क्या कारोबारी के यहां कभी आयकर विभाग या किसी अन्य एजेंसी की छापेमारी हुई थी और उसका इस नकदी से कोई संबंध है?

फिलहाल ये सवाल जांच के संभावित पहलू हैं। इन संभावनाओं की पड़ताल संबंधित रिकॉर्ड, बयानों और लेनदेन की समयरेखा के आधार पर ही हो सकेगी।

मोबाइल रिकॉर्ड का मिलान कर सकता है आयकर विभाग

आयकर विभाग अब राकेश यादव और उनके परिवार के बैंक खातों में जमा-निकासी, जमीन की खरीद के भुगतान, रजिस्ट्री की तारीखों और उपलब्ध मोबाइल रिकॉर्ड का मिलान कर सकता है। पुणे में रोजगार की अवधि, वेतन और कथित सेठ के कारोबार से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा सकती है।

जांच का मकसद केवल ड्रमों में मिली रकम की बरामदगी का हिसाब लगाना नहीं, बल्कि यह पता लगाना है कि रकम का वास्तविक मालिक कौन है और इसे प्रयागराज तक लाने की कड़ी क्या है। फिलहाल राकेश ने पूछताछ में पूरी रकम खुद के होने का दावा किया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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