गोरखपुर,  NOI :  अब एसी थर्ड ही नहीं सभी श्रेणियों की यात्रा भी इकोनामी (अर्थव्यवस्था के अनुरूप यात्रा) होगी। पुख्ता सुरक्षा के साथ सफर भी सस्ता होगा। स्पेशल के नाम पर अतिरिक्त किराया देने वाले यात्रियों को किराए और सुविधाओं में राहत मिलेगी। इकोनामी एसी कोच की सफलतापूर्वक संचालन से उत्साहित रेलवे बोर्ड ने अब सभी कोचों में सीटें और बर्थें बढ़ाने की योजना तैयार की है। 52 की जगह 58 बर्थ वाली एसी टू कोचों का परीक्षण भी शुरू हो गया है। एसी फार्स्ट, स्लीपर और पावरकार में भी बर्थ और सीटों को बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है।

अन्य श्रेणी की बोगियों में भी आमदनी व सुविधाओं की संभावनाएं तलाश रहा रेलवे

बोर्ड के दिशा-निर्देश पर पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन इकोनामी एसी कोचों की तरह अन्य श्रेणियों में भी आमदनी और सुविधाओं की संभावनाएं तलाशने में जुट गया है। अफसरों की टीम सभी श्रेणी के कोचों की पड़ताल कर रही हैं। टीम देख रही हैं कि किन-किन बोगियों में सीट या बर्थें बढ़ाई जा सकती हैं। सीट या बर्थों को बढ़ाने के बाद यात्रियों की सुविधाओं में कैसे इजाफा हो सकता है। साथ ही विज्ञापन को आकर्षित करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।


एसी फर्स्ट व स्लीपर की यात्रा भी होगी इकोनामी

जानकारों का कहना है कि एसी फर्स्ट, सेकेंड, स्लीपर और पावरकार को भी एसी थर्ड के इकोनामी कोच जैसे तैयार किया जा सकता है। एसी थर्ड की तरह इन कोचों में भी पर्याप्त जगह है। बर्थों और गैलरी की साइज को छोटा कर और वेंडरों की आलमारी हटाकर इन कोचों को भी इकानोमी जैसा बनाया जा सकता है। लिंकहाफमैन बुश (एलएचबी) कोच के पावरकार में भी दिव्यांग और महिलाओं के लिए 34 बर्थ हैं। पावरकार में भी बर्थों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा एलएचबी के एसी टू में 52, एसी थर्ड में 72, एसी फर्स्ट में 24 और टूएस में 100 सीटें हो गई हैं।

दरअसल, इकोनामी एसी कोचों में आरामदायक सीटें हैं। सभी बर्थों पर लैपटाप व मोबाइल चार्जर प्वाइंट की सुविधा है। कोच पूरी तरह फायर प्रूफ (अग्निरोधी) हैं, जिनमें सीसी कैमरे लगे हैं। दिव्यागंजन के लिए रैंप भी है। ऊपर से किराया भी कम है।

यहां जान लें कि गोरखपुर से बनकर चलने वाली कोचीन एक्सप्रेस में एक-एक इकोनामी एसी थर्ड श्रेणी के कोच लगने शुरू हो गए हैं। यशवंतपुर, मद्रास, त्रिवेंद्रम और सिकंदराबाद तक की यात्रा करने वाले लोगों को किराए में 105 रुपये का फायदा मिल रहा है। 72 की जगह 83 बर्थ हो गई है। ऐसे में रेलवे को 11 बर्थ का लाभ मिलने लगा है।


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