ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले अब एक-साथ भरवा रहे जुर्माना
मालूम हो कि हफ्तेभर से चल रही मुहिम में दो सौ से ज्यादा आटो रिक्शा और करीब सौ मैजिक वैन को ट्रैफिक पुलिस ने पकड़ा है। आरटीओ की कार्रवाई अलग चल रही है। दोनों विभाग मिलकर जब्त गाड़ियों के कागजात देखने के साथ ही कैमरों के चालान भी दिखवा रहे हैं।
दरअसल, वहीं 2015 से अभी तक जितनी बार ट्रैफिक कायदों को तोड़ते हुए कैमरों ने कैद किया है, उसका जुर्माना भी भराया जा रहा है। सबसे ज्यादा चालान आटो रिक्शा और मैजिक वालों के ही बनते हैं। स्टाप लाइन पर रुकते नहीं और मौका पाते ही चाहे जहां से निकल जाते हैं। शहर के 28 चौराहों पर कैमरे लगे हैं इनमें कैद होने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने ई-चालान भी भेजे थे, लेकिन ज्यादातर भरते ही नहीं हैं। इसलिए कई गाड़ियों के चार से लेकर सौ चालान तक हैं। अब जब गाड़ियां जब्त की जा रही हैं, तो पहले कैमरे के चालान ही भरवाए जा रहे हैं। नतीजन, चालान के रूप में साढ़े तीन लाख रुपये ट्रैफिक विभाग के पास जमा हुए हैं।
वहीं इंदौर में जब से मुहिम शुरू हुई है, फर्जी गाड़ियां गायब हो गई हैं। परमिट वाली गाड़ियों की आड़ में बिना परमिट की गाड़ियां चलाई जाती हैं। ये गाड़ियां शहर के उन इलाकों में दौड़ती हैं, जहां पुलिस की कार्रवाई नहीं होती है। शहर से सटे इलाकों में तो बिना परमिट के आटो रिक्शा ही चलते नजर आते हैं। जानकार बता रहे हैं कि परमिट का बड़ा खेल किया जाता है। एक परमिट को दो गाड़ियों पर दिखाकर चलाया जाता है। जिन्हें पकड़ना आसान नहीं होता।
ट्रैफिक एडिशनल का कहना है कि पांच साल से जिन्होंने चालान नहीं भरे हैं, उनसे यह भी भरवाए जा रहे हैं। परमिट, फिटनेस और दूसरी खामियों पर आरटीओ और कोर्ट से जुर्माना हो रहा है, लेकिन गाड़ी छोड़ने से पहले कैमरों के चालान की एनओसी मांगी जा रही है। गाड़ी मालिक खुद चालान निकलवा कर भर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ की कार्रवाई में कई गाड़ियां ऐसी पकड़ी गईं जिनके कागजात पूरे थे, लेकिन इन्हें भी छोड़ने से पहले कैमरों के चालान भरवाए गए। कागज पूरे रखते हैं, मगर नियम ये भी तोड़ते हैं। ट्रैफिक पुलिस के लिए यह मुहिम फायदेमंद साबित हो रही है। जिन चालानों को भरवाने के लिए वो सालों से परेशान हो रहे थे। मुहिम के बाद आसानी से भरे जा रहे हैं। पांच से ज्यादा चालान होने पर पुलिस गाड़ी मालिक के घर भी पहुंची थी, जहां से गाड़ियां गुजरती हैं, वहां धरपकड़ भी की गई थी, लेकिन मुहिम ज्यादा दिन दम नहीं भर पाई था। कुछ गाड़ी मालिकों के लाइसेंस भी रद्द कराए गए थे, मगर इससे भी फायदा नहीं मिला था। वजह थी कि लाइसेंस कुछ दिनों के लिए रद्द किया जाता है। जिसे पकड़वाना आसान नहीं है।
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