यूपी चुनाव 2022 : नितिन गडकरी आज करेंगे चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग का शिलान्यास, 65 सौ करोड़ रुपये से बनेगी 252 किमी सड़क
सैकडो गांवों को जोड़ेगा परिक्रमा मार्ग, विकास व पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
मखौड़ा धाम से शुरू होने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को तो लाभ मिलेगा ही साथ ही अन्य के जीवन में भी व्यापक बदलाव होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित होने से इसके किनारे के गांवों के लोगों को हर लिहाज से काफी सहूलियत होगी। सरकार की इस घोषणा के चलते श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है। इस मार्ग के बनने से इस पूरे क्षेत्र के विकास और पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। मार्ग से जुड़े बाजारों व गांवों के लोगों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ने के साथ रोजगार का अवसर भी मिलेगा।
सैकड़ों गांव जुड़ेंगे मार्ग से
चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग से विक्रमजोत, परशुरामपुर व दुबौलिया ब्लाक के करीब 65 किलोमीटर के सैकड़ों गांवों के लोग को सीधे जुड़ेंगे। 252 किलोमीटर लंबी यह सड़क करीब साढे छ हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी। यह सड़क तीन मंडलों के पांच जिलों से होकर यह गुजरती है। यही नहीं बस्ती में यह मार्ग मखौड़ा, बेरता, कोहराएं, रजवापुर, केनौना, रामगढ़ होते हुए विक्रमजोत के नल्हियापुर गांव के पास राष्ट्रीय राजामार्ग 28 से होकर रामरेखा मंदिर अमोढ़ा, रामजानकी मार्ग, दुबौलिया, विशेषरगंज, हनुमान बाग चकोही होकर अयोध्या जनपद के श्रृंगिऋषि आश्रम पहुंचती है। जिसकी लंबाई करीब 65 किमी है। 84 कोसी परिक्रमा वापसी के समय जिले की सीमा हैदराबाद सिकंदरपुर, रायपुर, तथागता के रास्ते पुन: मखौड़ा धाम पहुंच कर परिक्रमा का समापन होता है।
करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र धर्मनगरी भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए लंबे समय से कवायद चल रही है। धीरे-धीरे योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। मार्ग पर परिक्रमार्थियों एवं श्रद्धालुओं के लिए पैदल पथ व चौरासी कोसी परिक्रमा में पड़ने वाले ऋषि, महर्षियों तथा मंदिरों व आश्रमों की संकेतक पट्टी लगाने, पड़ाव स्थलों पर रैन बसेरा बनाने के साथ ही, परिक्रमा पथ के किनारे गर्मी और धूप से बचने के लिए छायादार वृक्षों के पौधे रोपित किए जाएंगे।
इन बाजारों से गुजरेगा परिक्रमा मार्ग
84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले गांव व बाजोरों में परशुरामपुर विकास क्षेत्र के यरता बाजार, संसारपुर, दुखेड़ी, मजगवां, नेदुला, कोहराएं बाजार, टेढ़ाघाट, रजवापुर, नगरा बदली बाजार, केनौना, रामगढ़, छावनी बाजार, रामरेखा, अमोढ़ा सहित अन्य गांव व बाजारें प्रमुख हैं।
यह है महत्व
सनातन धर्म में चौरासी कोस की यात्रा का काफी महत्व है। मान्यता है कि परिक्रमा 84 लाख योनियों से मुक्ति पाने का एक मात्र मार्ग है। मनुष्य का शरीर भी चौरासी अंगुल की माप का है। धार्मिक के साथ ही इसका सामाजिक महत्व भी है। मान्यताओं के अनुसार अयोध्या के राजा श्रीराम का साम्राज्य 84 कोस (252 किलोमीटर) में फैला था। उनके राज्य का नाम कौशलपुर था, उसकी राजधानी अयोध्या थी। इसी कारण से दशकों से 84 कोसी परिक्रमा की परंपरा है। लोग इस परिक्रमा को करके जन्म चक्र से मुक्ति चाहते हैं। यात्रा के मार्ग में उत्तर प्रदेश के छह जिले आते हैं। बाराबंकी, फैजाबाद, गोंडा, बहराइच, अंबेडकरनगर और बस्ती जिला। इन जिलों में यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव होते हैं। जहां रुककर यात्री विश्राम करते हैं और फिर से अपनी यात्रा पर चल देते हैं। पुन: फिर मखौड़ा धाम में यात्रा का समापन होता है यात्रा समापन के पश्चात यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे का आयोजन किया जाता है।
परिक्रमा मार्ग चौड़ीकरण होने से परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होगी। मार्ग पर पड़ने वाले सैकड़ों गांव के लोगों का भी विकास होगा। यह परिक्रमा मार्ग अयोध्या की चौरासी कोस का रिंग रोड क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। - सूर्य नारायण दास वैदिक, मुख्य पुजारी, मखौड़ा धाम मंदिर।
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