लखनऊ, NOI:  सड़क हादसे, ऊंचाई से गिरने व सिर में लगने वाली किसी भी चोट को हल्के में न लें। चोट लगने के तुरंत बाद घायल बेहोश हो सकता है। कई बार जान पर आ जाती है। कई बार लोग सिर में चोट लगने पर नजर अंदाज कर देते हैं। कोई खास दिक्कत न होने पर डाक्टर की सलाह तक नहीं लेते हैं। ऐसे लोगों में कुछ समय बाद इनके व्यक्तित्व और व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन व भूलने की समस्या समेत कई दूसरी दिक्कतें हो जाती हैं। रविवार को विश्व सिर चोट जागरूकता दिवस पर संजय गांधी पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट (एसजीपीजीआइ) में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि विश्व में 2050 तक मृत्यु दर का प्रमुख कारण सिर की चोट होगा।

लिहाजा सिर की चोट को हल्के में न लें। हर साल 20 मार्च को विश्व सिर चोट जागरूकता दिवस मनाया जाता है।ट्रामा सेंटर के प्रभारी प्रोफेसर राजकुमार ने कहा कि देश में सड़क यातायात दुर्घटनाओं में हर साल लगभग 80 हजार लोग मारे जाते हैं। यह दुनिया भर में होने वाली मौतों का लगभग 13 प्रतिशत है। पीजीआई के ट्रामा सेंटर और न्यूरोलाजी विभाग की ओपीडी में सिर में चोट लगने से होने वाली समस्याओं के साथ लगभग 20 से 30 मरीज आते हैं। डा. राजकुमार ने कहा कि यातायात नियमों का सख्ती से पालन कर हादसों से बचा जा सकता है।निदेशक प्रो. आरके धीमन ने कहा कि सिर की चोट से इंसान जीवन भर के लिए दिव्यांग हो सकता है। ऐसे में सिर की चोट को नजरअंदाज न करें।

यह अपनाएं

  • यातायात नियमों का पालन करें
  • अच्छी गुणवत्ता का हेलमेट पहनें
  • हमेशा सीट बेल्ट लगायें।
  • सड़क पर चलते समय मोबाइल पर बात न करें।

25 वर्ष की आयु के घायलों में सिर की चोट अधिक, इन लक्षणों को पहचानें

लखनऊ, [रामांशी मिश्रा]। ब्रेन इंजरी नौजवानों की मौत और विकलांगता का सबसे आम कारण है। भारत में हर वर्ष लगभग 20 लाख लोग हेड इंजरी का शिकार होते हैं जिनमें से दो लाख अपनी जान गवां देते हैं। मरने वालों में सबसे ज्यादा 18 से 44 आयु वर्ग के पुरुष होते हैं। हेड इंजरी के सबसे ज्यादा मामले लगभग 50% सड़क दुर्घटना में, 25% गिरने के कारण और 20% किसी प्रकार की हिंसा में शामिल होने से आते हैं। जनमानस में सिर की चोट और ट्रामा से बचने की जानकारी देने के लिए प्रतिवर्ष 20 मार्च को विश्व हेड इंजरी जागरूकता दिवस और द ब्रेन इंजरी एसोसिएशन आफ अमेरिका द्वारा मार्च में ब्रेन इंजरी जागरूकता माह मनाया जाता है।

सिर पर चोट लगने को लेकर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दीपक सिंह कहते हैं, अगर सिर में दर्द के साथ उल्टी हो, एक मिनट से ज्यादा की बेहोशी या फिर कान और नाक से खून आए तो उसे नजरअंदाज न करें। डा दीपक सिंह के मुताबिक, रात में सोत वक्त अगर झटके आएं तो इसे भी हल्के में न लें और संबंधित रोग के विशेषज्ञ को तत्काल दिखाएं। डाक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन कराएं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से भविष्य में पैरालिसिस और कोमा का खतरा बढ़ सकता है। 

वहीं, केजीएमयू के डिपार्टमेंट आफ इमरजेंसी मेडिसिन के अध्यक्ष प्रो. हैदर अब्बास कहते हैं कि हेड इंजरी के मामलों में पीड़ित को प्लेटिनम आवर (एक घंटे के भीतर) अगर सही उपचार दिया जा सके तो बचने की संभावना बढ़ जाती है। हेड इंजरी होने पर पीड़ित जल्द ही बेहोशी की हालत में जाने लगता है। ऐसे में गोल्डेन मिनट यानी जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाए जाने की आवश्यकता होती है।

राम मनोहर लोहिया की जूनियर प्रोफेसर डा. ममता हरजाई ने बताया कि हेड इंजरी के 30 से 40 प्रतिशत मामलों में 18 से 25 साल आयु वर्ग के लोग शामिल होते हैं। हेलमेट का उपयोग न होने से ज्यादातर को अपनी जान गंवानी पड़ती है।

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