नई दिल्ली, NOI :- विशेषज्ञों ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती के केंद्र सरकार के फैसले से राजकोषीय घाटे पर दबाव पड़ेगा, जो चालू वित्त वर्ष में अनुमानित तौर पर सकल घरेलू उत्पाद के 6.4 प्रतिशत रह सकता है। बता दें कि सरकार ने शनिवार को पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में रिकॉर्ड 8 रुपये प्रति लीटर की कटौती की और डीजल पर 6 रुपये की कटौती की ताकि उच्च ईंधन की कीमतों से जूझ रहे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। देश में मुद्रास्फीति के कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंचने के पीछे ईंधन की उच्च कीमतें बड़ा कारण हैं। पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कटौती से सरकार को प्रति वर्ष लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।

इसके कारण पड़ने वाले असर के संदर्भ में आईसीआरए ने एक रिपोर्ट में कहा है, "हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2023 में राजकोषीय घाटा मामूली रूप से बढ़कर जीडीपी के 6.5 प्रतिशत तक हो सकता है, जिसे लेकर बजट अनुमान 6.4 प्रतिशत का है।" वहीं, एक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च की चीफ एनालिटिकल ऑफिसर सुमन चौधरी ने कहा कि उत्पाद शुल्क में कटौती और स्टील उत्पादों सहित कुछ कमोडिटीज के आयात तथा निर्यात की दर में संशोधन से वित्त वर्ष 2023 के लिए राजकोषीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जो कि बजट में अनुमानित 6.4 प्रतिशत से अधिक खराब स्थिति में जा सकता है। यह अधिक उधारी की ओर ले जाता है।

उन्होंने कहा कि इससे निर्यात में धीमी वृद्धि भी हो सकती है क्योंकि लौह अयस्क और पेलेट जैसी वस्तुओं ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में मजबूत निर्यात वृद्धि में योगदान दिया है। BofA ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा हाल ही में किए गए शुल्क उपायों से राजकोषीय घाटे पर दबाव पड़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया, "आरबीआई द्वारा सरकार के लिए हाल ही में स्वीकृत 300 अरब रुपये का लाभांश भी बजटीय संख्या से कम है। कुल मिलाकर, अब हम FY23 में राजकोषीय घाटे में 40-50bp की कमी का जोखिम देखते हैं।"

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