COVID-19 Third Wave : कोरोना की तीसरी लहर के लिए एसजीपीजीआइ की तैयारी पूरी, हर बेड पर 24 घंटे ऑक्सीजन
लखनऊ, NOI : COVID-19 Third Wave: तीसरी लहर से जंग की तैयारियों का जायजा लेने रविवार को दैनिक जागरण की टीम संजय गांधी स्नात्कोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंची। यहां राजधानी कोविड अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए विशेष रूप से तैयारी होती दिखी। तीसरी लहर में सर्वाधिक खतरा नवजातों से लेकर 18 वर्ष तक के किशोरों पर जताया जा रहा है। लिहाजा हमें यहां पीडियाट्रिक आइसीयू (पीकू) में इंतजाम देखने थे। हम सबसे पहले राजधानी कोविड अस्पताल-1 (आरसीएच-1) गए। इसमें हमें 28 बेड मिले। सभी बेडों तक आक्सीजन की पाइपलाइन भी दिखी। इसके बाद हमने आरसीएच-2 का रुख किया। इसे मुख्य पीडियाट्रिक आइसीयू बनाया गया है, जिसमें 72 बेडों का इंतजाम है। यहां भी सभी बेड तक आक्सीजन की सुविधा मिली। इसके साथ ही बहुत से वेंटिलेटर व बाइपैप मशीनों का भी इंतजाम मिला।
वैसे तो कोविड की दूसरी लहर के दौरान राजधानी कोविड अस्पताल समेत एसजीपीजीआइ में कुल 328 आइसीयू बेडों का इंतजाम था। इसमें से आइसोलेशन के 50 बेड हैं। यह सभी आक्सीजनयुक्त, मॉनीटरयुक्त व जरूरत पडऩे पर यहां अन्य जीवनरक्षक उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकता है। वहीं 278 बेड आइसीयू व एचडीयू के हैं। यहां करीब 25 वेंटिलेटर व इतने ही बाईपैप मशीनें हैं।
100 बेड के आइसीयू में 25 वेंटिलेटर 15 बाइपैप: यहां पीडियाट्रिक आइसीयू के 100 बेड तैयार हैं। इसमें 25 वेंटिलेटर व 15 बाईपैप मशीनें हैं। एसजीपीजीआइ के अन्य बेड एडल्ट के लिए पहले की तरह सुरक्षित रहेंगे।
हर 20 बेड पर डाक्टर समेत चार स्टाफ: एसजीपीजीआइ के निदेशक डा. आरके धीमन ने बताया कि तीसरी लहर से जंग के लिए हम 200 फीसद तैयार हैं। हर 20 बेड की यूनिट के लिए डाक्टर समेत चार स्टाफ की तैनाती रहेगी। इसमें एक पीडियाट्रिक के डाक्टर, एक क्रिटिकल केयर मेडिसिन एनेस्थीसियाके डाक्टर, एक नर्स व एक टेक्नीशियन शामिल हैं। आक्सीजन की हमारे यहां कोई किल्लत नहीं है। सभी बेड पर अपने प्लांट से सीधे सप्लाई की व्यवस्था है। सभी स्टाफ को तीसरी लहर के मद्देनजर प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। डाक्टरों व स्टाफ की हमारे यहां कोई कमी नहीं है।
दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए विशेष वेंटिलेटर: एसजीपीजीआइ में दो वर्ष की उम्र से कम व 10 किलो से कम वजनी बच्चों के लिए विशेष वेंटिलेटर की व्यवस्था भी की गई है। बालरोग विशेषज्ञों के अनुसार दो वर्ष से अधिक व 10 किलो से ज्यादा वजनी बच्चों में बड़ों को लगने वाले वेंटिलेटर काम करेंगे। संक्रमण के दौरान बच्चों को नेबुलाइज करने के लिए अलग से मशीनों व नेबुलाइजेशन का सारा इंतजाम है।
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