जयपुर,  NOI :-  राजस्थान के दूधारू पशुओं में तेजी से फैल रहे त्वचा रोग लंपी वायरस ने पशुपालकों की नींद उड़ा रखी है। सैंकड़ों की संख्या में गाय और भैंस लंपी वायरस की चपेट में आ चुकी हैं। लंपी वायरस की सबसे ज्यादा शिकार गाय हो रही है। पिछले दो सप्ताह में बड़ी संख्या में गायों की मौत इस रोग के कारण हुई है। पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और पाली जिलों के पशुओं में यह रोग तेजी से फैल रहा है। पहले तो सरकार ने इस रोग को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन जब दूधारू पशुओं की मौत का सिलसिला लगातार बढ़ने लगा तो कृषि एवं पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने अधिकारियों की बैठक लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सकों से घर-घर सर्वे करवाने के निर्देश दिए हैं।कटारिया ने पशुओं के इलाज में लापरवाही नहीं बरतने के लिए कहा है। वहीं गौपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने भी अपने विभाग को गौवंश की सुरक्षा पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। गौशालाओं में विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। सरकार ने पशुमेला के आयोजन और एक से दूसरे स्‍थान पर ले जाने पर रोक लगा दी है। सैंपल लेकर टेस्ट करवाने का प्रक्रिया शुरू अधिकारियों ने कहा कि यह रोग कोरोना वायरस की तरह तेजी से फैल रहा है। संक्रमित पशु के संपर्क में आने से स्वस्थ्य पशु भी इस रोग की चपेट में आ जाता है। ये वायरस जनित रोग है। प्रदेश में गाय,भैंस जैसे दूधारू पशुओं में तेजी से फैलने के साथ ही कुछ बैल को भी इसने अपनी चपेट में लिया है।पशुपालन विभाग के उप निदेशक रतनलाल जीनगर ने माना कि दूधारू पशुओं में त्वचा रोग फैल रहा है। इससे कमजोर पशु की जल्दी मौत होती है। यह ज्यादातर गायों में ही फैल रहा है। उन्होंने कहा कि बाड़मेर की कामधेनू गौशाला में यह बीमारी सामने आने के बाद सभी गौशालाओं में सैंपल लेकर टेस्ट करवाने की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई है। बीमारी के यह है लक्षण पशु चिकित्सकों ने बताया कि लंबी चर्म रोग होने पर पशुओं के शरीर पर गांठें बनने लगती है। उन्हे तेज बुखार आ जाता है। सिर और गर्दन के हिस्सा में काफी तेज दर्द होता है। इस दौरान पशुओं की दूध देने की क्षमता भी कम हो जाती है। अब तक के अध्ययन के अनुसार यह रोग मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है। दूषित पानी ,लार और चारे के कारण भी यह रोग होने की बात सामने आई है। गायों और भैंसों के एक साथ तालाब में पानी पीने,नहाने और एकत्रित होने पर कुछ दिनों के लिए रोक लगाने को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

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