भोपाल NOI :-  गृह मंत्रालय ने हाल ही में देश के विभिन्न नक्सल प्रभावित राज्यों के प्रभावित जिलों की समीक्षा की थी जिसमें बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त हो चुके हैं और अगले एक साल में छत्तीसगढ़ भी इस समस्या से मुक्त हो जाएगा। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक के अनुसार लगातार नौ महीने से चल रहे इस आपरेशन में इन राज्यों के नक्सली नेता या तो मारे गए हैं या गिरफ्तार किए गए हैं। वहीं जानकारी हो कि इसके साथ ही झारखंड के बूढ़ा पहाड़ और बिहार के चक्रबंधा इलाके में पहली बार सुरक्षाबलों को मौजूदगी दर्ज कराने में सफलता मिली है। 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, शीर्ष नक्सल गढ़ में महीनों तक चले अभियान में 14 नक्सली मारे गए और 590 नक्सलियों ने या तो आत्मसमर्पण कर दिया या गिरफ्तार कर लिया गया। अमित शाह ने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। शाह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति जारी रहेगी और उनके खिलाफ अभियान तेज किया जाएगा। झारखंड से गिरफ्तार नक्सलियों में एक करोड़ के इनामी प्रशांत बोस, 25 लाख के इनामी प्रद्युमन शर्मा, एक करोड़ के इनामी मिथिलेश महतो उर्फ भिखारी और 25 लाख के इनामी करुणा दी शामिल हैं।
सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह के अनुसार झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने इसी साल आठ फरवरी से नक्सलियों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। सबसे पहले 'आपरेशन बुलबुल' के तहत नक्सलियों की सप्लाई चेन को तोड़ा गया। फिर 'आपरेशन आक्टोपस' के तहत बूढा पहाड़ और चक्रबंध जैसे क्षेत्रों में अभियान शुरू किया गया। जानकारी हो कि ये वो इलाके हैं जहां आज तक सुरक्षा बल पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाए थे, इससे पहले बुद्ध पहाड़ तक पहुंचने के लिए कई आपरेशन किए गए।

मालूम हो कि कुछ इलाकों में सुरक्षा बल पहली बार पहुंचे हैं। पहली बार बूडा पहाड़, चक्रबंध और भीमबंध जैसे दुर्गम क्षेत्रों से माओवादियों को खदेड़कर सुरक्षा बलों के स्थायी शिविर लगाए गए हैं। जिनमें से एक 40 दिनों तक चला, लेकिन नक्सलियों के सामने सुरक्षाबलों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। आखिरी आपरेशन 25 मई को चक्रबंध और 4 सितंबर को बूढा पहाड़ पर शुरू किया गया था। कुलदीप सिंह ने कहा कि बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में नक्सलियों की संगठित मौजूदगी खत्म हो गई है। ये हमारे लिए एक बड़ी समस्या का समाधान होना है।

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