Exclusive Interview: धामी ने कहा - एसजीपीसी के लिए बेअदबी पर इंसाफ व मतांतरण सबसे बड़ी चुनौती
भाजपा, कांग्रेस व आप बीबी जगीर कौर को जितवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया, उसका सदस्यों ने बुरा मनाया
दरअसल, एसजीपीसी के चुनाव में दो दशक बाद शिअद के लिए इतना चुनौतीपूर्ण था। इसमें धामी को मिली जीत से शिअद को राहत के संग आक्सीजन भी मिली है। इसके साथ ही मतांतरण, बेअदबी के मुद्दे पर इंसाफ, बंदी सिखों की रिहाई और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों के गायब होने जैसी कई चुनौतियां हैं, जिनसे एसजीपीसी को दो-चार होना पड़ेगा। हरजिंदर सिंह धामी खुद भी इस बात को स्वीकार करते हैं।
अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन लालपुरा को हटाने के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखेंगे
उनके लिए यह जीत क्या मायने रखती है और आने वाले दिनों में इन चुनौतियों का सामना करने के लिए उनके पास क्या रणनीति है, इसे लेकर NOI ने उनसे एसजीपीसी के चंडीगढ़ में विशेष बातचीत की। पेश है उसके मुख्य अंश:-
- पिछली बार आपको आसानी से जीत मिल गई थी, लेकिन इस बार आपको अपनी ही पार्टी की वरिष्ठ नेता बीबी जगीर कौर से चुनौती मिली। इस पर क्या कहेंगे?
-शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के हर चुनाव में चुनौतियां मिलती रहती हैं। यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और उनकी सरकार ने बीबी जगीर कौर को जितवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया, उसका सदस्यों ने बुरा मनाया। इन सभी पार्टियों के साथ देने के बावजूद सिख पंथ ने शिरोमणि अकाली दल के प्रति एकजुटता दिखाई।
..लेकिन भाजपा नेता तो इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं?
- अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा ने क्या हमारे सदस्यों को बीबी जगीर कौर को वोट देने में अपनी भूमिका नहीं निभाई। क्या किसी आयोग के चेयरमैन को इस प्रकार की भूमिका निभानी चाहिए। हम उन्हें इस पद से हटाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे। हालांकि, मुझे प्रधानमंत्री से भी ज्यादा उम्मीद नहीं है।
और किन किन नेताओं, मंत्रियों ने सदस्यों को फोन किया?
-कई हैं, लेकिन मैं अभी इसका खुलासा नहीं करूंगा। अब आप दूसरी बार एसजीपीसी के प्रधान बन गए हैं।
आपके सामने कौन सी पंथक चुनौतियां हैं?
- जब से एसजीपीसी बनी है, तभी से हम चुनौतियों से लड़ रहे हैं। इस समय पंजाब में लालच देकर जिस तरह से मतांतरण करवाया जा रहा है, यह हमारे लिए चिंता का विषय है। हमने सीमावर्ती जिलों में प्रचारकों की टीमें बनाकर भेजी हैं, जो उन घरों में भी जा रहे हैं, जो लालचवश मतांतरित हो गए हैं। दूसरी बड़ी चुनौती बंदी सिखों की रिहाई है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के केस के छह और लोगों को छोड़ दिया है, लेकिन जब सिखों की बारी आती है तो सभी चुप हो जाते हैं। हमारे लिखे पत्रों का जवाब तक नहीं देते। सरकारें हमारे धैर्य की परीक्षा न लें। जो लोग जेलों में बंद हैं और अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
हाल ही में शिवसेना नेता सुधीर सूरी और डेरा प्रेमी प्रदीप की हत्या हुई है, आप इन्हें कैसे देखते हैं?
-धर्म के नाम पर ऐसी किसी भी कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन आप सुधीर सूरी के वीडियो देखें। वह किस तरह नफरत फैला रहा था। सरकार को किसी भी धर्म के खिलाफ ऐसी शब्दावली प्रयोग करने वालों पर समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए। यही वीडियो यदि किसी और धर्म का व्यक्ति डालता, तो उस पर केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया जाता। इसी तरह गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला है। सात साल बाद भी इंसाफ नहीं मिला। कांग्रेस व आम आदमी पार्टी की सरकारों ने इस पर खूब राजनीति की, लेकिन आज तक इंसाफ नहीं दिया।
..लेकिन 2015 से लेकर 2017 तक शिअद की भी सरकार रही, उन्होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की?
-तभी तो दो बार से अकाली दल सत्ता से बाहर है। हालांकि, पंथक संगठनों के कहने पर यह मामला सीबीआइ को जांच के लिए दिया गया था। उन्होंने जांच पूरी नहीं की। अकाली सरकार ने बेअदबी के मामले में सजा को तीन साल से बढ़ाकर उम्रकैद भी किया।
अमृतपाल की गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं, वह सिखों को गुलाम बता रहा है। इस पर क्या कहेंगे?
-मैं सिखों को गुलाम तो नहीं कहूंगा। हां, उनके साथ नाइंसाफी जरूर हो रही है। इसलिए निराश होकर लोग कई बार गुमराह हो जाते हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब ने श्री दरबार साहिब से गुरबाणी का प्रसारण करने के लिए अपना चैनल बनाने के निर्देश दिए थे, अब तक अमल क्यों नहीं हुआ?
-नहीं ऐसी बात नहीं है। हमने एक कमेटी बनाई हुई है, जिसकी पांच बैठकें हो चुकी हैं। जनवरी में हम एसजीपीसी का यूट्यूब चैनल शुरू कर देंगे, जो हमारी गतिविधियों की जानकारी देगा। बाकी कमेटी की रिपोर्ट आने कोई फैसला होगा।
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