UP Labour Code 2026: योगी कैबिनेट की मंजूरी, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान अनिवार्य
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। UP Labour Code 2026 | Minimum Wages in UP | प्रदेश में अब किसी भी कर्मचारी को तय न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन नहीं दिया जा सकेगा। नौकरी छोड़ने या सेवा समाप्त होने पर उसका पूरा बकाया दो दिन के भीतर चुकाना होगा।
तय समय से अधिक काम लेने पर दोगुनी दर से ओवरटाइम देना अनिवार्य होगा, जबकि महिला और पुरुष को समान काम के लिए समान वेतन मिलेगा। इन बड़े बदलावों वाली उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता-2025 को मंगलवार को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी।
नई संहिता लागू होने के बाद प्रदेश में वेतन भुगतान और श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। संविदा श्रमिकों की मजदूरी और बोनस का भुगतान सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी मुख्य नियोक्ता की होगी। वेतन देने से पहले वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा और कर्मचारी की मृत्यु होने पर बकाया राशि उसके नामित व्यक्ति या वैधानिक उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
केंद्र सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर चार नई श्रम संहिताएं अधिसूचित की हैं। राज्यों को भी अपनी-अपनी नियमावलियां अधिसूचित करनी हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश और लक्षद्वीप यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।
अब इन्हीं के अनुरूप उत्तर प्रदेश ने अपनी मजदूरी संहिता-2025 तैयार की है। इसमें न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान, समान पारिश्रमिक और बोनस से जुड़े पुराने कानूनों को एकीकृत किया गया है। नई व्यवस्था के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करते समय कर्मचारी के कौशल, कार्य की प्रकृति और कार्यस्थल के भौगोलिक क्षेत्र को आधार बनाया जाएगा।
राज्य सरकार केंद्र द्वारा तय फ्लोर वेज से कम न्यूनतम मजदूरी निर्धारित नहीं कर सकेगी। साथ ही कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत मूल वेतन (बेसिक पे) रखना होगा, जिससे पीएफ, ईएसआईसी और ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ बढ़ेगा। वेतन से वैधानिक कटौती 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और निर्धारित समय से अधिक काम कराने पर सामान्य मजदूरी की दोगुनी दर से ओवरटाइम देना होगा।
नियोक्ताओं को भी मिलेगी राहत
नई संहिता से नियोक्ताओं के लिए भी अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी। अलग-अलग श्रम कानूनों के बजाय एकीकृत व्यवस्था लागू होगी। रजिस्टर और अन्य अभिलेख इलेक्ट्रानिक रूप में रखे जा सकेंगे।
विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील का प्रावधान होने से हर मामले में सीधे उच्च न्यायालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। निरीक्षण प्रणाली भी ऑनलाइन और जोखिम आधारित होगी। निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता न केवल कानून का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, बल्कि नियोक्ताओं और कर्मचारियों को आवश्यक मार्गदर्शन भी देंगे।
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