NOI संवाददाता, कानपुर। Lucknow Kanpur Expressway: एनएचएआई की कार्रवाई से एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में लापरवाही बरती गई। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और भारी भरकम खर्च के बावजूद सफर शुरू होने के 22 दिन के अंदर ही एक्सप्रेसवे की सड़क की कलई खुलकर सामने आ गई। शुरुआत से ही सफर के दौरान जर्क की समस्या सामने आई थी, लेकिन धीरे-धीरे और भी कमियां दिखने लगीं।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर किमी 64 पर 200 मीटर मरम्मत स्थल क्षेत्र में चल रहा कार्य। 

एक्सप्रेसवे पर 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। अगर भूमि अधिग्रहण और मुआवजे पर खर्च 591 करोड़ रुपये हटा दिए जाएं तो एक्सप्रेसवे के निर्माण में प्रति किमी औसतन लगभग 57 करोड़ रुपये लगे हैं। अब हालत यह है कि उन्नाव से लखनऊ के बीच 63 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के 45 किमी ग्रीन फील्ड हिस्से में 40 जगह छोटे-बड़े पैबंद यानी पैचवर्क के निशान हैं। सड़क की सतह असमान होने से वाहन जैसे ही रफ्तार पकड़ता है, तेज झटके महसूस होने लगते हैं।

लोकार्पण के दौरान एक्सप्रेसवे पर खड़े डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम आदित्यनाथ योगी। इंटरनेट मीडिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 13 जुलाई को एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। इसे अत्याधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय निर्माण और भविष्य की स्मार्ट सड़क परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया था। दूसरे दिन से सफर शुरू हो गया तो लगा कि टोल ज्यादा है, पर पुराने हाईवे की अपेक्षा इस पर सफर ज्यादा आसान होगा। हालांकि शुरुआत से ही पुल-पुलिया के एक्सपेंशन ज्वाइंट की गड़बड़ियां सफर का मजा खराब कर रही थीं।

कानपुर -लखनऊ एक्सप्रेस वे पर सड़क धंसने के कारण मार्ग परिवर्तन होने पर एकल मार्ग से आते जाते वाहन। संजय यादव

26 जुलाई को पहली बार सड़क धंसी तो जैसे सिलसिला शुरू हो गया। अब तक छह स्थानों पर सड़क धंस चुकी है। उन्नाव से लखनऊ लेन पर 27 और उधर से वापस आने में 13 जगह पैचवर्क हैं। सबसे ज्यादा सड़क धंसने की समस्या उन्नाव से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन पर आई है।

0 Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Get Newsletter

Advertisement