UPPCL News: बैंकिंग के जरिए कर्नाटक से मिलने वाली लगभग ढाई हजार मेगावाट बिजली पर भी संकट है, क्योंकि कर्नाटक में भी बिजली की मांग बढ़ी हुई है।

NOI ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले लोगों को इन दिनों खासतौर से रात में घंटों बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है। राज्य की आधा दर्जन यूनिटों से तीन हजार मेगावाट से ज्यादा का बिजली उत्पादन ठप हो गया है।

प्रदेश में इन यूनिटों के ठप होने के पीछे तकनीकी कारणों के साथ ही कोयले की कमी है। लगातार बरसात के कारण कोयला गीला होने के कारण पावर प्लांट में सप्लाई कम हो रही है।

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन को पावर एक्सचेंज से भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। स्थिति यह है कि दिन में तो सोलर के सहारे प्रदेशवासियों को खूब बिजली मिल जा रही है लेकिन रात में तीन से चार घंटे गांव की बिजली कट रही है।

रात में इनदिनों बिजली की मांग लगभग 25 से 26 हजार मेगावाट के आसपास है। दिन में सौर ऊर्जा से भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध होने से प्रदेशवासियों को बिजली कटौती से नहीं जूझना पड़ रहा है, लेकिन रात में सौर ऊर्जा के न होने से खासतौर से गांव से लेकर कस्बों तक में बिजली का संकट रहता है।

लगभग तीन हजार मेगावाट बिजली की कमी को पूरा करने के लिए कारपोरेशन प्रबंधन ने पावर एक्सचेंज की ओर रुख तो किया लेकिन वहां से भी दस रुपये यूनिट में भी बिजली नहीं मिल सकी है। बैंकिंग के जरिए कर्नाटक से मिलने वाली लगभग ढाई हजार मेगावाट बिजली पर भी संकट है, क्योंकि कर्नाटक में भी बिजली की मांग बढ़ी हुई है।

प्रदेश की जिन यूनिटों से बिजली उत्पादन ठप है उनमें 300 मेगावाट की रोजा, 660 की घाटमपुर, 250 की हरदुआगंज, 660 की मेजा, 250 की हरदुआगंज, 660-660 मेगावाट की ओबरा है। रात में तीन-चार घंटे बिजली कटने की भरपाई दिन में सोलर से उपलब्ध पर्याप्त बिजली से की जा रही है जिससे गांवों को कुल मिलाकर तो लगभग 18 घंटे बिजली दी जा रही है लेकिन रात में वहा अंधेरा ही रहता है।

प्रदेश में रात के वक्त बिजली के संकट को देखते हुए उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बंद चल रही बिजली उत्पादन इकाइयों को तत्काल चालू कराए जाने की सरकार से मांग की है।

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