दिल्ली के प्रमुख प्रदूषण प्रभावित इलाकों में शामिल आनंद विहार को अब हाटस्पाट की सूची से बाहर कर दिया गया है। राजधानी में 13 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र शुरू किए गए हैं, जिससे कुल संख्या 60 हो गई है।

NOI, नई दिल्ली। दिल्ली के प्रमुख प्रदूषण प्रभावित इलाकों में शामिल आनंद विहार को अब प्रदूषण हाटस्पाट की सूची से बाहर कर दिया गया है।

वहीं, राजधानी में हवा की निगरानी का दायरा बढ़ाते हुए 13 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही दिल्ली में ऐसे केंद्रों की संख्या 47 से बढ़कर 60 हो गई है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को आनंद विहार में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा की और शास्त्री पार्क स्थित दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के एआइ आधारित नियंत्रण केंद्र का दौरा किया।

11 विभागों और एजेंसियों को दिया जिम्मा

अधिकारियों के मुताबिक, आनंद विहार में वाहनों की भीड़, बसों की आवाजाही, सड़कों और कच्चे किनारों की धूल, गड्ढे, अधूरी पक्की सड़कें, निर्माण मलबा, कचरा और खुले में कचरा जलाना प्रदूषण के प्रमुख कारण थे।

इन्हें नियंत्रित करने के लिए 11 विभागों और एजेंसियों को अल्पकालीन और दीर्घकालीन उपायों की जिम्मेदारी दी गई। आंतरिक सड़कों को पक्का करने, अतिक्रमण हटाने, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने और अवैध मलबा हटाने जैसे कदम उठाए गए। अधिकारियों का दावा है कि साझा प्रयासों से अब यह इलाका प्रदूषण हाटस्पाट नहीं रहा।

एआइ केंद्र से होगी कई स्रोतों की निगरानी

शास्त्री पार्क स्थित नियंत्रण केंद्र पर हवा की गुणवत्ता, धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन, पराली जलाने की घटनाओं, शोर, नागरिकों की शिकायतों और कार्रवाई करने वाले वाहनों से जुड़ी सूचनाओं को एक मंच पर जोड़ा जा रहा है। कुल 15 बाहरी सूचना प्रणालियों को इससे जोड़ने की योजना है, जिनमें से नौ जुड़ चुकी हैं। इससे प्रदूषण की स्थिति पर वास्तविक समय में नजर रखने और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बसों और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

कार्यक्रम के दौरान आनंद विहार बस अड्डे, नंद नगरी, रोहिणी सेक्टर-37, नांगलोई और केशोपुर में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग केंद्रों का उद्घाटन किया गया। आनंद विहार स्थित स्वामी विवेकानंद अंतरराज्यीय बस अड्डे से नई इलेक्ट्रिक बसों को भी रवाना किया गया।

नए निगरानी केंद्र घुम्मनहेड़ा, छावला, कराला, हस्तसाल, झड़ौदा कलां, घोघा, बुराड़ी, टिकरी कलां, नरेला, मैदानगढ़ी, नांगलोई, वसुंधरा एन्क्लेव और बदरपुर में स्थापित किए गए हैं।

ये केंद्र हवा में प्रदूषक तत्वों के स्तर के साथ मौसम संबंधी आंकड़े भी लगातार दर्ज करेंगे। इनसे प्रदूषण के आकलन, नियमों के पालन की जांच और लोगों तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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