बिहार में सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर में प्रस्तावित दो ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए 7,373 एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो रही है। किसानों को मिलने वाले मुआवजे और जमीन की कीमत निर्धारण को लेकर अभी अंतिम दर तय नहीं हुई है, जो बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2020 के तहत तय होगी।

NOI  डेस्क, पटना। बिहार में दो बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की योजना के साथ अब हजारों किसानों की जमीन और उसकी कीमत का सवाल अहम हो गया है। सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर में प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए कुल 7,373 एकड़ जमीन जुटाने की तैयारी है। इसके लिए जमीन की खरीद की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों की जमीन का रेट कैसे तय होगा और उन्हें कितना पैसा मिलेगा? अधिकारियों के अनुसार, जमीन की खरीद बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2020 के प्रावधानों के तहत की जाएगी।

संबंधित रैयती भूमि क्रय समितियों और सक्षम प्राधिकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार कीमत तय होगी। प्रशासन पहले जमीन का पूरा विवरण जुटाएगा और फिर रैयतों से बातचीत कर खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। फिलहाल जमीन की अंतिम दर या किसानों को मिलने वाली मुआवजा राशि तय होने की जानकारी नहीं है।

सोनपुर एयरपोर्ट के लिए 4,228 एकड़ जमीन

सारण जिले में प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट के लिए लगभग 4,228 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसके लिए सोनपुर और दरियापुर अंचल के 26 मौजों को परियोजना के दायरे में रखा गया है।

इस पूरी प्रक्रिया से करीब 14,224 रैयत और उनकी जमाबंदियां जुड़ी हैं। जमीन की खरीद से पहले भूखंडों का विवरण, स्वामित्व और संबंधित राजस्व अभिलेखों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।

इसके बाद रैयतों से बातचीत कर कीमत तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इतने बड़े क्षेत्र में जमीन जुटाने के लिए प्रशासनिक समन्वय और भू-अभिलेखों की जांच अहम भूमिका निभाएगी।

भागलपुर-मुंगेर में 3,145 एकड़ जमीन की जरूरत

भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में प्रस्तावित अजगैबीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए लगभग 3,145 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। इस परियोजना के दायरे में 14 मौजे और करीब 12,000 रैयतों की जमीन आएगी।

इसके लिए भागलपुर सदर, सुल्तानगंज, मुंगेर सदर, तारापुर और बरियारपुर अंचलों के भूखंड चिह्नित किए गए हैं। अलग-अलग अंचलों में फैली जमीन के कारण भू-अभिलेखों का मिलान, स्वामित्व की पहचान और रैयतों से बातचीत इस प्रक्रिया के प्रमुख चरण होंगे।

किसानों को कितना मिलेगा पैसा? अभी तय नहीं हुई अंतिम दर

दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए जमीन की कीमत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तय की जाएगी। संबंधित रैयती भूमि क्रय समितियां और सक्षम प्राधिकार इसके लिए दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम करेंगे।

किसानों को मिलने वाली वास्तविक राशि जमीन के विवरण और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। अभी प्रति एकड़ या प्रति कट्ठा जमीन की कोई अंतिम दर सामने नहीं आई है।

इसलिए फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि किसी किसान को कितनी राशि मिलेगी। जमीन की खरीद से पहले दर और अन्य संबंधित शर्तों का स्पष्ट होना रैयतों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

सहमति से जमीन खरीदने की तैयारी, जरूरत पड़ी तो कानूनी प्रक्रिया

सरकार की योजना किसानों से सीधे बातचीत कर जमीन खरीदने की है। इसके लिए पहले संबंधित भूखंडों और उनके मालिकों का पूरा विवरण जुटाया जाएगा।

यदि जमीन की कीमत और खरीद को लेकर आपसी सहमति बन जाती है, तो नीति के तहत खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

यदि सहमति नहीं बनती है, तो लागू कानूनों के अनुसार भूमि अधिग्रहण का रास्ता अपनाया जा सकता है। इस वजह से जमीन की कीमत पर बातचीत दोनों परियोजनाओं की प्रगति का अहम पहलू होगी।

सलाहकार एजेंसी करेगी प्रशासनिक प्रक्रिया में मदद

जमीन की खरीद और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के लिए सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। एजेंसी प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कार्यों में सहयोग करेगी।

जमीन का विवरण जुटाने, संबंधित अभिलेखों को व्यवस्थित करने और प्रक्रिया में समन्वय बनाने जैसे कामों में इसकी भूमिका रहेगी।

हालांकि, जमीन की कीमत निर्धारित करने का अधिकार तय समितियों और सक्षम प्राधिकार के दिशा-निर्देशों के तहत ही इस्तेमाल किया जाएगा।

एयरपोर्ट की राह में सबसे अहम चरण होगी जमीन की खरीद

सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर में एयरपोर्ट बनने से बिहार की हवाई कनेक्टिविटी को विस्तार मिलने की उम्मीद है। लेकिन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले जमीन की खरीद और जरूरत पड़ने पर अधिग्रहण से जुड़े चरण पूरे करने होंगे।

हजारों रैयतों से बातचीत, भू-अभिलेखों का सत्यापन और कीमत निर्धारण इस प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे। फिलहाल दोनों परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाने की तैयारी की जा रही है।

किसानों को कितनी राशि मिलेगी और जमीन की खरीद कब तक पूरी होगी, इसकी तस्वीर आधिकारिक दरों और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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