राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई) कानपुर का 91वां स्थापना दिवस 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जिसमें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि होंगी। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों, पूर्व अधिकारियों और वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाएगा, साथ ही जल संरक्षण पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित होगी।

NOI  संवाददाता, कानपुर। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई) कानपुर का 91वां स्थापना दिवस समारोह 15 अक्टूबर को होगा। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि होंगी, जबकि प्रदेश के गन्ना विकास एवं शर्करा उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर प्रगतिशील गन्ना किसानों के साथ संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाएगा।

संस्थान की निदेशक डॉ. सीमा परोहा ने बताया कि समारोह सुबह 11 बजे संस्थान परिसर स्थित शर्करा सौध में आयोजित होगा। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की स्थापना अक्टूबर 1936 में हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एचबीटीआइ) के शर्करा अनुभाग को अलग करके इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर टेक्नोलॉजी के रूप में की गई थी।

स्वतंत्रता के बाद इसका नाम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर टेक्नोलॉजी रखा गया। वर्ष 1957 में इसका नाम राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कर दिया गया। वर्ष 1963 में संस्थान कल्याणपुर स्थित 525 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले परिसर में स्थानांतरित हुआ।

संस्थान चीनी, एथेनॉल, सह-उत्पादों और जैव-ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने के साथ अनुसंधान एवं परामर्श सेवाएं भी प्रदान करता है। भारतीय चीनी उद्योग के आधुनिकीकरण और तकनीकी विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

समारोह में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों और उन्नत गन्ना किस्मों को अपनाकर प्रति हेक्टेयर उल्लेखनीय पैदावार प्राप्त करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा। संस्थान की शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान गतिविधियों में योगदान देने वाले पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को भी सम्मान मिलेगा।

जल संरक्षण और प्रदूषण रोकथाम पर संगोष्ठी

स्थापना दिवस पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के व्यापक चार्टर-2.0 के तहत जल संरक्षण एवं प्रदूषण की रोकथाम विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित होगी। इसमें चीनी और आसवनी उद्योगों के अधिकारियों व तकनीकी कर्मचारियों को अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों (ईटीपी) के प्रभावी संचालन, उपचारित जल के पुनः उपयोग, शून्य तरल निष्कासन (जेडएलडी) और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य औद्योगिक प्रदूषण कम करने, जल संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

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