राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कानपुर में क्राफ्टरूट्स एक्सपो का उद्घाटन किया, जहां उन्होंने पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।

NOI  संवाददाता, कानपुर। पारंपरिक हुनर को रोजगार से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। विश्वविद्यालय अनुभवी शिल्पियों को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में जोड़ें, वहीं जेन-जी भी पारंपरिक कलाओं को अपनाकर उन्हें नई पहचान दे।

यह बात शुक्रवार को प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित क्राफ्टरूट्स एक्सपो का उद्घाटन करते हुए कही। उन्होंने कुलपतियों से गोद लिए गए आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए कारीगरों से हस्तनिर्मित परिधान खरीदने का सुझाव भी दिया।

राज्यपाल ने कहा कि गंगा या त्रिवेणी में स्नान से पुण्य मिलता है, लेकिन किसी एक कारीगर परिवार को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देना उससे भी बड़ा पुण्य है। देशभर से कारीगर कई बसें और ट्रेनें बदलकर अपने उत्पादों के साथ प्रदर्शनियों में पहुंचते हैं। उनके प्रत्येक उत्पाद के पीछे वर्षों का अनुभव, मेहनत और पीढ़ियों से चला आ रहा हुनर होता है। समाज को उनके श्रम का उचित मूल्य दिलाना चाहिए।

जेन-जी को पारंपरिक कला से जोड़ें

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पारंपरिक कलाओं को बचाने के लिए नई पीढ़ी की भागीदारी जरूरी है। कारीगर बदलती पसंद के अनुरूप नए डिजाइन और उत्पाद तैयार कर रहे हैं। युवाओं को इन कलाओं से जुड़कर आधुनिक जरूरतों के हिसाब से नए प्रयोग करने चाहिए। इससे पारंपरिक विरासत सुरक्षित रहने के साथ रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ेंगे।

आंगनवाड़ी के बच्चों को दें हस्तनिर्मित परिधान

राज्यपाल ने बताया कि तीन से छह वर्ष के बच्चे आंगनवाड़ी सम्मेलनों में मंच पर शानदार प्रस्तुतियां देते हैं। उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम जरूरी हैं।

उन्होंने कुलपतियों से कहा कि वे अपने गोद लिए आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए शिल्पकारों से पांच से दस जोड़ी परिधान खरीदकर उपलब्ध कराएं। इससे बच्चों को कार्यक्रमों के लिए किराये के कपड़ों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और कारीगरों को भी काम मिलेगा।

कारीगरों को पढ़ाने का मिले अवसर

उन्होंने विश्वविद्यालयों में अनुभवी शिल्पियों को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में जोड़ने पर जोर दिया। विद्यार्थियों को कार्यशालाओं के माध्यम से डिजाइन, निर्माण, गुणवत्ता और बाजार की व्यावहारिक जानकारी दी जाए। उन्होंने कारीगरों की सूची बनाकर उन्हें सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण और 50 हजार रुपये से लेकर पांच-दस लाख रुपये तक के ऋण की उपलब्धता के अनुसार सहायता दिलाने की बात भी कही।

अनारबेन और जयेश के प्रयासों की सराहना

राज्यपाल ने गुजरात के कच्छ में भूकंप के बाद अनारबेन पटेल और जयेश के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दोनों ने कारीगरों के घर जाकर उनके काम को समझा, उत्पादों का विवरण तैयार कराया और डिजाइन व उचित मूल्य निर्धारण पर काम किया। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और कारीगरों को उनके श्रम का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिली।

कार्यक्रम में रिमझिम इस्पात के सीएमडी योगेश अग्रवाल, अनारबेन पटेल सीएसजेएमयू के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता एचबीटीयू के कुलपति प्रोफेसर समशेर पीएसआईटी के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर मनमोहन शुक्ला सहित उद्यमी, हस्तशिल्पी और कला प्रेमी मौजूद रहे। राज्यपाल ने प्रदर्शनी के स्टॉलों का निरीक्षण कर कारीगरों से उनके उत्पादों और बाजार की संभावनाओं की जानकारी ली।

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