लखनऊ,NOI : देश में शैक्षिक सत्र 2022-23 में एक डिजिटल यूनिर्सिटी की स्थापना की जाएगी। इसके माध्यम से विश्वस्तरीय गुणवत्ता के साथ सभी को घर बैठे पढ़ाई का विकल्प मुहैया कराया जाएगा। हाल ही में केंद्रीय बजट में इसकी घोषणा होने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय ने इसमे अपना योगदान देने की कवायद शुरू कर दी है। कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने वरिष्ठ शिक्षकों की बैठक कर इस संबंध में प्रस्ताव बनाने के लिए कहा है। शिक्षकों को 16 फरवरी तक डिजिटल यूनिवर्सिटी के लिए लवि के योगदान, ई-लैब, वर्चुअल लैब, ई-कंटेंट, वन टीवी वन चैनल से लेकर डिजिटल टीचर के संबंध में अपनी रिपोर्ट और प्रस्ताव देना है। 

कोरोना काल में पूरी शिक्षा व्यवस्था बेपटरी पर आ गई थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने सभी विद्यार्थियों को डिजिटल या आनलाइन माध्यम से शिक्षा से जोड़ने रखने के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा की है। कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय डिजिटल यूनिवर्सिटी के लिए किस प्रकार से सबसे पहले अपना योगदान दे सके, इस पर चर्चा की गई है। कैसे उच्च स्तरीय कंटेंट तैयार किए जाएं, डिजिटल टीचर की संकल्पना कैसे क्रियान्वित की जाए ? लैब को किस प्रकार से वर्चुअल माध्यम से चलाया जा सके। इन सबके लिए अलग-अलग शिक्षकों को प्रस्ताव बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।

लवि में बनेगी बौद्विक संपदा सेल : कुलपति ने बताया कि जल्द ही विश्वविद्यालय में बौद्विक संपदा सेल स्थापित की जाएगी। इसके माध्यम से यह देखा जाएगा कि वेबसाइट पर जो ई-कंटेंट हम दे रहे हैं, वह कैसा है। छात्र-छात्राओं के लिए कितना लाभकारी है ? ई-कंटेंट में साहित्यिक चोरी भी बड़ा मुद्दा होता है, इस पर भी सेल नजर रखेगी।

इन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी : वर्चुअल लैब के प्रस्ताव के लिए प्रो. अनिल मिश्रा, डिजिटल टीचर के लिए डीएसडब्ल्यू प्रो. पूनम टंडन, वन टीवी वन चैनल और ई-कंटेंट के लिए डीन रिसर्च प्रो. राजीव पांडेय और डिजिटल यूनिवर्सिटी के संबंध में योगदान के लिए प्रस्ताव एप्लाइड इकोनामिक्स की विभागाध्यक्ष प्रो. रचना मुज्जू को देने के लिए कहा गया है।

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