Ukraine News : कानपुर के अधिकतर छात्र यूक्रेन से निकले, अन्य देशों में लिए हैं शरण | न्यूज़ आउटलुक
हालात तनावपूर्ण होने से पहले ही निकल आए शांतनु व दैव्यम
किदवईनगर निवासी डा. संजीव प्रताप सिहं के बेटे शांतनु सिंह ने बताया कि वह ओडेसा मेडिकल विवि से एमबीबीएस पांचवें वर्ष के छात्र है। गुरुवार को वह भी अपने घर लौट आए। उन्होंने बताया कि रूस के यूक्रेन में हमले के बाद हमारे शहर में उतना तनाव नहीं था। 26 तारीख को हम हंगरी बार्डर पर पहुंचे और 12 घंटे इंतजार करने के बाद 27 तारीख को हंगरी पहुंचे। वहां से भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने रिसीव किया। दूतावास के अधिकारी बुडापेस्ट एयरपोर्ट के पास ले गए और दो मार्च को फ्लाइट मिली। इस दौरान खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था बेहतर थी। साथ में फर्रुखाबाद का दोस्त वरुण गंगवार भी था। वह चौथे वर्ष का छात्र है। वहीं बर्रा पांच निवासी दैव्यम बाजपेई भी गुरुवार रात अपने घर पहुंच गए। वह भी ओडेसा मेडिकल विवि से पांचवें वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि 27 तारीख को रोमानिया बार्डर पहुंचे। पहले एक संस्था की मदद से होटल में रुके। अगले दिन बार्डर पार किया। रोमानिया में व्यवस्थाएं ठीक थीं और हमें कोई परेशानी नहीं हुई। बेटे की आने पर मां ने तिलक लगाकर स्वागत किया और गले से लगा लिया। दैव्यम के साथ ही ओडेसा से रोमानिया तक का सफर तय करने वाले उनके जिगरी दोस्त विपुल ङ्क्षसह दूसरी फ्लाइट से भारत आएंगे। उनके स्वजन बेटे का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को फ्लाइट की संख्या और बढ़ानी चाहिए, ताकि जल्द से जल्द सभी छात्र भारत आ जाएं। दैव्यम ने बताया कि एयरपोर्ट में विपुल उनसे बिछड़ गए थे।
यूक्रेनी सैनिकों ने ही की मदद तो पार किया बार्डर
विनिट्सिया नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र जवाहरपुरम निवासी रयान खान भी गुरुवार को अपने घर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि यूक्रेन के हालात बहुत खराब हैं। 24 फरवरी को धमाके शुरू होने के बाद दो दिन तक वह दोस्तों के साथ बंकर में रहे। एक मिसाइल तो उनसे एक किमी दूर स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में गिरी और वहां भीषण आग लग गई। यही नहीं, जरूरत का सामान सुपर मार्केट खुलने पर खरीदा। इसके बाद किसी तरह रोमानिया बार्डर के लिए चले, लेकिन बस चालक ने बार्डर से 12 किमी पहले ही उतार दिया। जहां से पैदल गए। बार्डर पर देखा कि हजारों की भीड़ थी। काफी देर बाद यूक्रेनी सैनिकों ने ही उन्हें बार्डर पार कराकर रोमानिया भेजा।
ग्वालटोली की अक्षरा पोलैंड बार्डर पर, भाई खारकीव में फंसा
खारकीव मेडिकल विवि से मेडिकल की छात्रा ग्वालटोली सूटरगंज निवासी अक्षरा सिंह गुरुवार को पोलैंड बार्डर पर पहुंच गई, लेकिन अभी तक उनका भाई आरव खारकीव के पास एक छोटे से गांव पेसोचिम में फंसा है। बेटे के फंसे होने के कारण यहां उनकी मां मधुरिमा व अन्य स्वजन बेहद परेशान हैं। मधुरिमा ने बताया कि बेटी पोलैंड बार्डर पर है और लंबी लाइन होने के कारण वह शुक्रवार तक बार्डर पार कर सकेगी। अब तक आरव को भारतीय दूतावास ने सुरक्षित निकालने का कोई इंतजाम नहीं किया है। उन्होंने बताया कि बेटे को तेज बुखार है और वह ठीक से बात भी नहीं कर पा रहा है। वहां खाने-पीने का भी इंतजाम नहीं है।
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