कानपुर, NOI : कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय सर्वोदय नगर में बड़ी फर्मों के पीएफ भुगतान आदि वित्तीय मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) व विभागीय विजिलेंस (सतर्कता विभाग) की टीम को हेरफेर का संदेह है। यही वजह है कि संयुक्त टीम ने मंगलवार सुबह 11 से रात 10 बजे तक 11 घंटे की छापेमारी की कार्रवाई के दौरान स्थानीय अफसरों को दूर रखा। रात में टीम डिजिटल रिकार्ड लेकर रवाना हो गई। अब अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर उच्चाधिकारियों से जवाब-तलब करेंगे ताकि पीएफ भुगतान में हुई गड़बड़ियों में संलिप्त अधिकारियों को जांच के दायरे में शामिल कर सकें। अगले माह एक बार फिर संयुक्त टीम आने की चर्चा है।

छापेमारी के दूसरे दिन बुधवार को ईपीएफओ के उच्चाधिकारी दफ्तर पहुंचे और पूरा दिन बैठक में व्यस्त रहे। प्रवर्तन शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को हुई छापेमारी में संयुक्त टीम ने जांच के दौरान पूरा फोकस लेखा व प्रवर्तन शाखा के रिकार्ड पर रखा। टीम ने कर्मचारियों से पिछले सालों के दौरान बड़ी फर्म जेके जूट मिल व एलएमएल कंपनी सहित अन्य बड़ी फर्म से संबंधित पीएफ की फाइलें मंगवाकर जांच की और उनका रिकार्ड ले गई। क्षेत्रीय आयुक्त (प्रथम) अमोल राज सिंह से इस बाबत पक्ष चाहा गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

इन बिंदुओं पर जुटाया ब्योरा

- क्षेत्रीय कार्यालय में पिछले तीन माह में कितने अंशधारकों के दावों का निपटान कितने समय में हुआ।

- अंशधारकों के ब्योरे में त्रुटियां ठीक करने, रिकवरी के लिए नियोक्ताओं को कितने नोटिस भेजे गए।

- पेंशन से जुड़े मामले।

पीएफ पाने को महीनों चक्कर काटते हैं अंशधारक : ईपीएफओ कार्यालय में पीएफ दावा निपटान, पेंशन, खाते में दर्ज ब्योरा ठीक कराने के लिए अंशधारकों को महीनों चक्कर कटवाए जाते हैं। पूछताछ केंद्र पर बैठे कर्मचारी पीएफ धारकों को रिकार्ड आनलाइन होने का तर्क देकर परेशान करते हैं। ऐसे में लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। कार्यालय आने वाले अधिकांश अंशधारकों को समाधान न मिलने पर मायूस होकर लौटना पड़ता है।

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