बेटी और प्रेमी को उम्रकैद की सजा : तकिया से मुंह दबाकर मारा, ज्योति से बनी थी माहिरा अली | NOI
कानपुर में प्रेमी के साथ मिलकर मां की हत्या करने वाली बेटी और उसके प्रेमी को अपर जिला जज 14 अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ने उम्रकैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। महाराजपुर निवासी सरोजनी साहू ने चकेरी के सफीपुर निवासी उमाशंकर साहू से दूसरी शादी की थी।
उमाशंकर की मौत हो गई थी। दोनों के एक बेटी ज्योति थी। 19 वर्षीय ज्योति को पड़ोस की जेके रेयान कालोनी निवासी मोईन अली से प्यार हो गया। दोनों शादी करने की जिद कर रहे थे, जबकि सरोजनी मना करती थी। 18 अक्तूबर 2017 को सरोजनी के भाई महाराजपुर निवासी रामप्रकाश व मनोज साहू बहन से मिलने आए।
इस दौरान घर में ज्योति और मोईन मौजूद थे। सरोजनी पर शादी का दबाव बना रहे थे। उन्हें देखकर मोईन तैश में आकर सरोजनी को देख लेने की धमकी देकर चला गया था। फिर दोनों भाई भी अपने घर चले गए। अगले दिन सरोजनी को फोन मिलाया तो फोन नहीं उठा। दोनों भाई फिर सफीपुर पहुंचे, तो देखा कि सरोजनी का शव पड़ा था।
इस दौरान घर में ज्योति और मोईन मौजूद थे। सरोजनी पर शादी का दबाव बना रहे थे। उन्हें देखकर मोईन तैश में आकर सरोजनी को देख लेने की धमकी देकर चला गया था। फिर दोनों भाई भी अपने घर चले गए। अगले दिन सरोजनी को फोन मिलाया तो फोन नहीं उठा। दोनों भाई फिर सफीपुर पहुंचे, तो देखा कि सरोजनी का शव पड़ा था।
मामा ने लिखाई थी भांजी व प्रेमी के खिलाफ रिपोर्ट
शव के पास में तकिया भी पड़ा था। ज्योति और मोईन फरार थे। रामप्रकाश ने चकेरी थाने में भांजी ज्योति व मोईन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। एडीजीसी शिवभगवान गोस्वामी ने बताया कि मृतका के दोनों भाइयों रामप्रकाश व मनोज साहू समेत सात गवाह कोर्ट में पेश किए। कोर्ट ने दोनों को दोषी मानकर सजा सुनाई।
शव के पास में तकिया भी पड़ा था। ज्योति और मोईन फरार थे। रामप्रकाश ने चकेरी थाने में भांजी ज्योति व मोईन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। एडीजीसी शिवभगवान गोस्वामी ने बताया कि मृतका के दोनों भाइयों रामप्रकाश व मनोज साहू समेत सात गवाह कोर्ट में पेश किए। कोर्ट ने दोनों को दोषी मानकर सजा सुनाई।
कोर्ट ने माना... यह शासन को चुनौती देने वाला अपराध
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवाह न करने देने पर बेटी ने प्रेमी संग मिलकर मां की हत्या कर दी। यह एक गंभीर और शासन को चुनौती देने वाला अपराध है। हालांकि एडीजीसी की फांसी की सजा की मांग पर कोर्ट ने कहा कि हत्या के तरीके में क्रूरता नहीं दिखती। इसलिए फांसी की सजा नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवाह न करने देने पर बेटी ने प्रेमी संग मिलकर मां की हत्या कर दी। यह एक गंभीर और शासन को चुनौती देने वाला अपराध है। हालांकि एडीजीसी की फांसी की सजा की मांग पर कोर्ट ने कहा कि हत्या के तरीके में क्रूरता नहीं दिखती। इसलिए फांसी की सजा नहीं दी जा सकती।
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