NOI संवाददाता, कानपुर। कानपुर से प्रयागराज के बीच का सफर जल्द ही मात्र 90 मिनट में पूरा हो सकेगा, क्योंकि इस रूट पर कवच सेफ्टी सिस्टम लागू कर दिया गया है और ट्रैक को 160 किमी प्रति घंटा की गति के अनुरूप मजबूत किया गया है। इससे आने वाले दिनों में हाईस्पीड ट्रेन संचालन का रास्ता साफ होगा। अभी ट्रेनों को प्रयागराज पहुंचने में लगभग ढाई से तीन घंटे लगते हैं, क्योंकि औसत रफ्तार 100 किमी प्रतिघंटा की है।

दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर 160 किलोमीटर की रफ्तार के लिए ट्रैक किनारे चहारदीवारी तैयार की जा रही है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, कानपुर-प्रयागराज रेलखंड पर अभी 53 ट्रेनें हैं। अब इस रेलमार्ग पर यदि ड्राइवर किसी कारणवश सिग्नल नहीं देख पाता है तो कवच सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है। ट्रेन को लाल सिग्नल पार करने से रोकता है। घने कोहरे या खराब मौसम में भी लोकोमोटिव के केबिन के अंदर सटीक सिग्नल डिस्प्ले दिखाई देता है, जिससे ट्रेनें लेट नहीं होंगी।

वहीं, एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाएं तो यह तकनीक दोनों ट्रेनों को निश्चित दूरी पर खुद ही रोक देती है। साथ ही पटरियों को मजबूत व अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर दिया गया है। कानपुर से लेकर प्रयागराज तक ट्रैक के किनारे 95 प्रतिशत से ज्यादा चहारदीवारी तैयार की जा चुकी है।

कुछ जगहों पर अभी नहीं है, जिसे बनाया जा रहा है। इसे दीपावली तक बना लिया जाएगा। प्रयागराज रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि कानपुर से प्रयागराज रूट पर कवच सिस्टम लागू किया जा चुका है। हाईस्पीड संचालन के लिए ट्रैक पूरी तरह से तैयार हैं। 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दीपावली से प्रयागराज तक का सफर 90 मिनट में पूरा होने लगेगा।

राजधानी और वंदेभारत और जल्दी पहुंचेंगी

कानपुर से हावड़ा के लिए जाने वाली राजधानी व प्रयागराज तक के लिए राजधानी के अलावा वंदेभारत एक्सप्रेस और गरीब रथ जैसी ट्रेनों का हाईस्पीड संचालन से समय घटेगा। शुरुआती चरण में राजधानी व वंदेभारत ट्रेन के यात्रियों को फायदा मिलेगा। अभी तक सबसे कम समय में वंदेभारत एक घंटे 58 मिनट व राजधानी दो घंटे तीन मिनट में कानपुर से प्रयागराज पहुंचती हैं।

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