राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में पीएम श्री योजना (Bihar PM SHRI Yojana) के तहत 836 विद्यालय चयनित है। शिक्षा विभाग का आकलन यह है कि केंद्र से इस योजना के तहत मिलने वाली राशि और लागत में 2196.06 लाख का अंतर हो गया है। शिक्षा विभाग द्वारा केंद्र सरकार को इस योजना के आवंटन को संशोधित करने को लिखा गया है।

शिक्षा विभाग का आकलन

शिक्षा विभाग का यह आकलन है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 मे में अधिशेष योजनाओं के लिए इकाई लागत को वित्तीय वर्ष 2025-26 की स्वीकृत दरों और जेम, ई-टेंडर दरों से नीचे कर दिया गया है, जबकि इन कार्यों के तहत औपचारिक कार्यादेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इससे डिफॉल्ट की स्थिति बन रही है।

शिक्षा विभाग ने कुछ उदाहरण भी रखे

शिक्षा विभाग ने पीएम श्री विद्यालय के तहत की गयी कटौती के कुछ उदाहरण भी रखे हैं। इंटरैक्टिव पैनल के साथ स्मार्ट बोर्ड के मामले के बारे में बताया गया कि इसके लिए स्वीकृति तीन लाख रुपए का है जबकि कार्यादेश 4.99 लाख रुपए का है।

अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण के लिए स्नीकृति 17.17 लाख रुपए की है जबकि नर्माण 17.71 लाख रुपए में हो रहा। विद्यालयों में छात्र व छात्राओं के लिए जो शौचालय काम नहीं कर रहे उसे ठीक करने के लिए एक शौचालय के लिए स्वीकृति 50 हजार रुपए की है, जबकि खर्च 68 हजार रुपए का है।

शिक्षा विभाग का तर्क

शिक्षा विभाग का तर्क है कि इन कटौतियों की वजह से जो सिविल का काम चल रहा वह बीच में ही रूक जाता है। पारदर्शी प्रतिस्पर्घी बोली के माध्यम से तय गयी संविदा राज्य सरकार को डिफॉल्टर की स्थिति में ला खड़ा करती है।

पीएम श्री विद्यालय को ग्रीन स्कूल के रूप में हो रहे विकिसित

पीएम श्री विद्यालय की आधारभूत संरचना को ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित किया जाना है। इसके तहत पर्यावरण अनुकूल परिसर विकसित किए जा रहे। स्कूलों में सोलर पैनल, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और एलईडी लाइटिंग की व्यवस्था करनी है।

विद्यार्थियों के लिए डिजिटल व आधुनिक लैब

विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर लैब, साइंस व गणित की स्मार्ट कक्षाएं और पुस्तकालय की व्यवस्था होनी है।

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