अंसल टाउनशिप के बिजली सिस्टम में हुआ बड़ा बदलाव, अब मानमाने पैसे नहीं वसूल सकेगा बिल्डर; नया प्लान तैयार
अंसल टाउनशिप के बिजली उपभोक्ताओं को अब प्रति यूनिट के हिसाब से बिल देना होगा, बिल्डर मनमानी चार्ज नहीं वसूल सकेंगे।
NOI संवाददाता, लखनऊ। अंसल टाउनशिप में रहने वाले बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अब शहर के अन्य हिस्सों में रहने वाले बिजली उपभोक्ताओं की तरह उन्हें भी प्रति यूनिट के हिसाब से बिल देना होगा, बिल्डर मनमानी चार्ज नहीं वसूल नहीं कर सकेगा। अपार्टमेंट जो सिंगल प्वाइंट से चल रहे हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से मल्टी प्वाइंट यानी जो फ्लैट में रहने वाला आवंटी है, वह बिजली विभाग से अपनी जरूरत के हिसाब से कनेक्शन ले सकेगा।
इसके अलावा बिजली संकट जो गर्मियों में उपभोक्ताओं को झेलना पड़ा, उससे भी निजात चंद महीनों में मिल जाएगी। क्योंकि अंसल टाउनशिप में इन्फ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से 24 बिजली उपकेंद्र अंसल को बनाने थे, अब एलडीए इन्हें बनवाएगा।
एलडीए से हो सकती है बात
इसके अलावा 400 केवी व 200 केवीए के ट्रांसमिशन बिजली उपकेंद्र भी बनेंगे। इससे अंसल टाउनशिप में कई दशकों तक बिजली संकट नहीं रहेगा। वहीं जब तक व्यवस्था नहीं होती है, तब तक एलडीए यहां बन रहे अपार्टमेंट की बिजली सीजी सिटी व अन्य बिजली उपकेंद्र से देने के लिए एलडीए से बात कर सकता है।
अंसल टाउनशिप में जो बिजली उपकेंद्र चल रहा है, उसमें निर्धारित बिजली लोड से अधिक चल रहा है। इसको लेकर बिजली विभाग अंसल को नोटिस भी भेज चुका है लेकिन अब इन सब से निजात मिलने जा रही है। यहां आठ बिल्डरों के अपार्टमेंट बन रहे हैं। यह बिल्डर अस्थायी कनेक्शन लेकर अपने निर्माण से जुड़े कार्य कर रहे हैं।
यह बिल्डर लगातार लखनऊ विकास प्राधिकरण से आग्रह कर रहे थे कि उन्हें बिजली कनेक्शन के लिए स्थायी समाधान खोजे। क्योंकि किसी बिल्डर का प्रोजेक्ट वर्ष 2027 में पूरा हो रहा है तो किसी का वर्ष 2028 में।
इनमें मेसर्स आर्शय वेंचर्स, प्रा.लिमिटेड, मेसर्स ओरो इंफ्रा डेवलपर एलएलपी, जश्न रियालटी, मिगसन, मेसर्स महेश इन्फ्राकान प्रा.लिमिटेड, मेसर्स कनक बिहारी बिल्डर्स प्रा. लिमिटेड, मेसर्स आरएलवी वेन्चर्स प्रा.लि., रिशिता डेवलपर्स प्रा. लि. के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। बिजली कनेक्शन मिलने से इनमें फ्लैट लेने वालों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।
बता दें कि अंसल में बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए बिजली विभाग ने 2212 करोड़ रुपये का दावा राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के सामने किया था। अब इतनी राशि लगभग लखनऊ विकास प्राधिकरण को इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए खर्च करनी पड़ सकती है। इस राशि से बिजली के सभी जुड़े काम होने थे।
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