राज्य ब्यूरो, लखनऊ। भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ाने के लिए प्रयासरत राज्य सरकार ने आयुर्वेदिक दवाओं पर शोध, रोगों पर प्रभाव का परीक्षण करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर के साथ न सिर्फ अनुबंध किय बल्कि परीक्षण, प्रभाव आकलन के लिए अनुपूरक बजट में तीन करोड़ 25 लाख रुपए आवंटित किये हैं।

उत्तर प्रदेश में ऐसा प्रयोग पहली बार हो रहा है। हालांकि देश की दूसरी आइआइटी पहले ही स्तन कैंसर, न्यूरोडेजनेरेटिव बीमारियों (जैसे अल्जाइमर) पर आयुर्वेद के भस्मों, चूर्ण के प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं।

मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत अनुपूरक बजट में आइआइटी कानपुर में आयुर्वेद अनुसंधान क्लीनिकल प्रमाणीकरण के लिए 25 लाख रुपए आवंटित किये हैं। अनुसंधान और क्लीनिकल परीक्षण, प्रमाणीकरण के लिए अनुपूरक बजट में तीन करोड़ रुपए की व्यवस्था की गयी है।

राज्य सरकार ने पहली बार आयुर्वेदिक दवाओं पर परीक्षण का दिया प्रोजेक्ट 

आइआइटी कानपुर के निदेशक प्रो.मणीन्द्र अग्रवाल का कहना है राज्य सरकार ने पहली बार आयुर्वेदिक दवाओं पर परीक्षण का प्रोजेक्ट दिया है। आइआइटी कानपुर मेडिकल स्कूल की स्थापना पर पहले से कार्य कर रहा है। इस शोध प्रोजेक्ट के परिणाम से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिन पर निर्भरता कम होगी।

आइआइटी मुंबई कैंसर की शुरुआती पहचान, स्तन कैंसर पर आयुर्वेदिक दवा का असर, घाव भरने के लिए हर्बल ड्रेसिंग और धूपन यंत्र जैसी तकनीक विकसित करने पर काम कर रहा है। आइआइटी रुड़की के शोधकर्ता आयुर्वेद आधारित तत्वों और गोधन अर्क में मौजूद ऐसे बायोएक्टिव कंपाउंड्स की पहचान की है, जो चिकनगुनिया वायरस के खिलाफ प्रभावी एंटीवायरल क्षमता दिखाते हैं। प्रो.मणीन्द्र का कहना है कि उनके संस्थान के शोधकर्ता कैंसर पर आयुर्वेदिक दवाओं के प्रभाव का गहरायी से आकलन करेंगे।

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