विधि संवाददाता, NOI, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हेड कांस्टेबल (मोटर ट्रांसपोर्ट) पद पर पदोन्नति के लिए पांच अक्टूबर 2025 को हुई विभागीय परीक्षा में शामिल 176 अभ्यर्थियों का पूरा परिणाम और चयनित अभ्यर्थियों का सिटिंग प्लान तलब किया है।

याचियों ने परीक्षा में इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जरिए बड़े पैमाने पर नकल और अनियमितता का आरोप लगाते हुए परीक्षा निरस्त कर दोबारा कराने की मांग की है। सुनवाई में सामने आया कि बोर्ड ने परिणाम घोषित कर दिया है, लेकिन सभी अभ्यर्थियों का पूरा परिणाम वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया गया।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने यह आदेश कांस्टेबल-ड्राइवर शिव बाबू मिश्रा और छह अन्य की याचिका पर पारित किया है। याचिका में प्रैक्टिकल/टेक्निकल एफिशिएंसी टेस्ट के लिए अभ्यर्थियों के चयन समेत सभी परिणामी कार्रवाइयों को भी चुनौती दी गई है।
मंगलवार को सुनवाई के समय पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक कोर्ट में उपस्थित थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि वेबसाइट पर पूरा परिणाम उपलब्ध नहीं है। अभ्यर्थी अपना व्यक्तिगत परिणाम देख सकता है। इस पर कोर्ट ने सभी 176 अभ्यर्थियों का पूरा परीक्षा परिणाम तलब कर लिया। पिछली सुनवाई में बोर्ड ने कोर्ट को बताया था कि परीक्षा के दौरान केवल दो अभ्यर्थी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाए गए थे।

हालांकि, कोर्ट के निर्देश पर कराई गई जांच में तस्वीर अलग सामने आई। 22 जुलाई को अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक ने कोर्ट को बताया था कि 115 अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल और अन्य अनियमितताओं में शामिल पाया गया और उन्हें डिबार कर दिया गया है।

कोर्ट ने परीक्षा के सभी आठ ब्लाकों की फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। 10 अगस्त को संबंधित डिजिटल रिकार्ड कोर्ट के समक्ष पेश किए गए। कोर्ट ने कहा कि उचित निस्तारण के लिए परीक्षा की वीडियो रिकार्डिंग और उपलब्ध तस्वीरों का परीक्षण किया जाएगा।

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