NOI संवाददाता, लखनऊ। एलडीए के चर्चित घूसकांड की विजिलेंस जांच तेज हो गई है। बुधवार को विजिलेंस विभाग की टीम एलडीए मुख्यालय पहुंची और करीब ढाई घंटे तक देर शाम बैठकर संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार एलडीए के 11 इंजीनियरों और एक पीसीएस अधिकारी के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की गई है।

एक अगस्त को सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम ने एलडीए के अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और एक बिचौलिए श्रवण कुमार को कामर्शियल प्रापर्टी के निर्माण पर कार्रवाई न करने के एवज में साढ़े सात लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
विजिलेंस टीम ने अधिकारियों पर अवैध निर्माणों को संरक्षण देने, शिकायतों को प्रभावित करने व दलालों के माध्यम से काम कराने वालों की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। इनमें से एक अभियंता सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि अन्य सभी अभी कार्यरत हैं। टीम ने उन मामलों से जुड़े रिकार्ड एकत्र किए, जिनमें अवैध निर्माणों के संरक्षण, शिकायतों के निस्तारण में अनियमितता और कथित लेन-देन के आरोप लग चुके हैं।

जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की बात सामने आ रही है। कुछ अभियंताओं की आडियो रिकार्डिंग भी विजिलेंस के हाथ लगी है। इन रिकार्डिंग में कथित रूप से अभियंताओं की दलालों, कथित पत्रकारों और शिकायतकर्ताओं से बातचीत दर्ज है। उपलब्ध सामग्री से कई आरोपों की पुष्टि होने की संभावना बढ़ गई है।

आइजीआरएस पोर्टल पर सबसे अधिक अवैध निर्माणों की शिकायत करने वाले 18 कथित पत्रकारों की भूमिका की भी जांच शुरू की है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि शिकायतों के पीछे कोई दबाव या लाभ का उद्देश्य तो नहीं था। अलीगंज अग्निकांड के बाद जिन अभियंताओं को निलंबित किया गया था, वे भी विजिलेंस की जांच के दायरे में आ गए हैं।

 

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