NOI संवाददाता, कानपुर। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जरौली, गोपालपुर और पिपौरी के करीब 150 परिवार बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत शिविर तो बना दिए, लेकिन जमीनी हकीकत इन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। कहीं लोग घरों की दूसरी मंजिल पर पानी के बीच रहने को मजबूर हैं तो कहीं राहत शिविर खाली पड़े हैं।

प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें न तो राहत सामग्री दी गई और न ही शिविर में जाने की सूचना दी गई। पिपौरी गांव में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई परिवार घर की दूसरी मंजिल पर रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, पानी बढ़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से न तो नाश्ते और भोजन की व्यवस्था की गई और न ही उन्हें घर खाली कर राहत शिविर में जाने के लिए कहा गया। बाढ़ के पानी के साथ कुछ घरों में सांप और बिच्छू घुसने से लोगों में दहशत भी है। अधिकांश लोगों ने घर का जरूरी सामान छत पर रख दिया है। कई लोगों के वाहन भी घरों में ही फंसे हैं।

तीन किलोमीटर दूर बना दिया शिविर

पिपौरी के प्रभावित परिवारों के लिए नाज गेस्ट हाउस में राहत शिविर बनाया गया है। गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर बनाए गए इस शिविर में फर्श पर गद्दे तो बिछा दिए गए, लेकिन ग्रामीणों को वहां पहुंचाने या उन्हें शिविर की जानकारी देने की व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अनाउंसमेंट तक नहीं कराया गया। यही वजह रही कि शिविर में प्रभावित परिवार पहुंच ही नहीं सके।

नहीं मिल रही कोई सुविधा

पिपौरी निवासी सोनू ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई सुविधा नहीं मिली है। घर का सामान छत पर रखकर परिचित के यहां रहने को मजबूर हैं। उन्हें राशन किट तक नहीं दी गई। इसी गांव के किशोर ने बताया कि पानी लगातार बढ़ रहा है। उनके घर के अंदर करीब तीन फीट तक पानी है। फ्रिज और वाशिंग मशीन खराब हो गई है, जबकि बाकी सामान छत पर रख दिया गया है। बाइक भी घर में फंसी है। उन्हें न तो राहत सामग्री मिली और न ही किसी ने बताया कि राहत शिविर में जाना है। शिविर गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर होने की जानकारी भी बाद में मिली।

बर्रा के राहत शिविर में भी टपकती छत बनी मुसीबत

दूसरी ओर कंपोजिट विद्यालय विश्व बैंक, बर्रा में बनाए गए राहत शिविर में वरुण बिहार, बर्रा के करीब डेढ़ सौ लोग रह रहे हैं। यहां प्रशासन की ओर से भोजन, नाश्ता और पानी की व्यवस्था की गई है। छोटे बच्चों के लिए दूध भी उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि राहत शिविर में भी लोगों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

स्कूल की छत से पानी टपक रहा

विद्यालय की छत से लगातार पानी टपकने के कारण लोगों के लिए बिछाए गए गद्दे तक भीग गए। कमरों में सीलन भी काफी है। ऐसे में बाढ़ से घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे लोगों को भी रात गुजारने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कागज पर राहत शिविर, जमीन पर इंतजार

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि सिर्फ राहत शिविर बना देना ही पर्याप्त है या प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। पिपौरी में लोग पानी के बीच घरों में फंसे हैं, जबकि उनके लिए बनाया गया शिविर खाली पड़ा है। ग्रामीणों को शिविर तक पहुंचाने, भोजन-राशन उपलब्ध कराने और लगातार बढ़ रहे जलस्तर की स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए बेहतर व्यवस्था करने की जरूरत है।

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