उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे कई जिलों में बाढ़, मकान ढहने और फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

NOI डेस्क, नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रदेश भर में हालात बिगड़ गए हैं। सड़क-पुल सब कुछ पानी में बह गया है। कानपुर में कच्चे मकानों के गिरने और नदी, नालों में डूबने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

कानपुर देहात, बांदा, औरैया, महोबा और फर्रुखाबाद में मां-बेटी समेत नौ लोगों की मौत हो गई है। बाराबंकी में सरयू में मस्जिद समा गई है। बारिश और आंधी-तूफान से प्रदेश में 1000 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं।

बारिश व तेज हवा के कारण धान की फसल खेतों में गिर गई है, जिससे फसल सड़ने की आशंका है। गन्ना, मक्का व सब्जी की भी फसल को भी नुकसान हुआ है। इससे बाजार में सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। फसल बीमा कराने वाले किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज कराएं।

प्रदेश में आंधी-तूफान के कारण 56 लोगों की मौत

पिछले चार दिनों में प्रदेश के 75 जिलों में से 56 मिमी में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई है। फर्रुखाबाद में सामान्य से 7385 प्रतिशत, कन्नौज में 5664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4240 प्रतिशत तथा महोबा में 4100 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। 

राहत आयुक्त ने बताया कि पिछले 60 घंटों में अतिवृष्टि एवं आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 56 जनहानि, 107 पशुहानि तथा 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त 46 व्यक्तियों के घायल होने की सूचना है।

नारायणी नदी में बाढ़ से परेशानी बढ़ी

नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद कुशीनगर में गंडक (नारायणी) नदी में बाढ़ आ गई है। प्रयाराज में पिछले चार दिनों से हो रही वर्षा से मध्य प्रदेश की नदियों में नदियों में उफान आ गया है। केन नदी में सबसे ज्यादा जल स्तर बढ़ा है। बेतवा और टोंस नदी में भी बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह से यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा है।

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