उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी शोध और नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय बायोई-3 सेल का गठन किया जा रहा है।

NOI   ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध और नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय बायोई-3 सेल बनाने की तैयारी है। इससे प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को उद्योगों तक पहुंचाना, स्वदेशी तकनीक से नए उत्पाद तैयार करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

उत्तर प्रदेश प्रोमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) ने इसके लिए देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों की कमेटी गठित की है। इसमें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, आइआइटी, नाइपर रायबरेली और लखनऊ स्थित सेंटर आफ बायोमेडिकल रिसर्च के विशेषज्ञ शामिल हैं।

यूपीपीपीसी की सीईओ कृतिका शर्मा के अनुसार, कमेटी प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के विकास और शोध को उद्योगों से जोड़ने के लिए सुझाव देगी।

काउंसिल के निदेशक डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि इस पहल के तहत दवा अनुसंधान, औषधीय पौधों और जैव चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध विशेषज्ञता का लाभ लिया जाएगा।

केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ बैठक कर प्राथमिकताएं तय करने की भी तैयारी है। बायोई-3 पहल से नई तकनीकों के व्यावसायिक इस्तेमाल, स्टार्टअप, निवेश और कुशल रोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

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