लखनऊ में 4 और 5 नवंबर को 'एक जिला-एक व्यंजन' प्रदर्शनी आयोजित होगी, जिसमें प्रदेश के सभी 75 जिलों के पारंपरिक पकवानों की 125 दुकानें लगेंगी।

NOI  संवाददाता, लखनऊ। आतिथ्य के लिए प्रसिद्ध लखनऊ अब प्रदेश के 75 जिलों के स्वाद का साक्षी बनेगा। दैनिक जागरण एवं सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चार और पांच नवंबर को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'एक जिला-एक व्यंजन' (ओडीओसी) की भव्य प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें प्रदेश के सभी जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की 125 दुकानें एक ही स्थान पर सजेंगी।

यह आयोजन न केवल जायके के शौकीनों के लिए खास होगा, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और खान-पान की विरासत को करीब से जानने का अवसर भी देगा। आयोजन का शुभारंभ बुधवार को दोपहर एक बजे होगा।

प्रदेश के व्यंजन अपने स्वाद और विशिष्टता के लिए जाने जाते हैं। इन विशिष्टताओं को 'ब्रज की मिठास', 'अवध का जायका', 'रूहेली रसधार', 'बुंदेली बहार', 'पश्चिमी परिमल' संग 'पुरबिया स्वाद' जैसे मंडलों में दर्शाया जाएगा। अवध का जायका में लखनऊ की मक्खन मलाई, आलू की टिकिया, मटर की चाट, रेवड़ी व आम के उत्पाद प्रदर्शित होंगे, जाे यहां की खान-पान संस्कृति को खास बनाते हैं।

चाट में खट्टे-मीठे स्वाद का मेल, मसालों की खुशबू और मक्खन मलाई में मेवों का इस्तेमाल शहर की समृद्ध पाक परंपरा को दर्शाता है। यह परंपरा भी ओडीओसी प्रदर्शनी में दिखेगी। बाराबंकी की चंद्रकला, गोंडा का दही-बड़ा, रामपुर का हब्शी हलवा और बुंदेलखंड का सन्नाटा जैसे विशिष्ट व्यंजन आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे।

कानपुर का समोसा, औरैया की बालूशाही, कन्नौज की गट्टा मिठाई, सीतापुर का पेड़ा, उन्नाव का काला जामुन, हापुड़ का पापड़ और बागपत का घेवर तैयार करने की विधियां देखने और जानने को मिलेंगी। इनके साथ ही सभी जिलों के व्यंजनों का जायका लेने का अवसर भी मिलेगा। स्थानीय कारीगरों और पाक विशेषज्ञों के हुनर को पहचान दिलाने वाला यह अपने आप में अनूठा आयोजन होगा।

स्थानीय उत्पादों को भी मिलेगा नया मंच

आयोजन का उद्देश्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एक जिला-एक व्यंजन योजना को प्रोत्साहित करना और स्थानीय कारीगरों, पाक विशेषज्ञों तथा छोटे उद्यमियों को व्यापक पहचान दिलाना है। व्यंजनों के साथ प्रदेश के सभी जिलों के प्रमुख उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इससे एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।

प्रदेश के विभिन्न जिलों की खाद्य परंपराओं, स्थानीय हुनर और स्वदेशी उत्पादों का यह संगम लखनऊ की सांस्कृतिक समृद्धि को भी प्रदर्शित करेगा। स्वाद, परंपरा और उद्यमिता को एक मंच पर जोड़ने वाला यह आयोजन प्रदेश की विविधता को एक नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगा।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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