NOI संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में सबसे बड़े जनहानि वाले अग्निकांड की जांच में पग-पग पर लापरवाही मिलती दी जा रही है। अवैध व्यावसायिक भवन की पोल अब खुल रही है। जेल में बंद भवन स्वामी के खिलाफ सोमवार को एक और मुकदमा दर्ज कराया गया है।

अलीगंज में सेक्टर-डी के अवैध व्यावसायिक भवन में पिछले सोमवार को हुए अग्निकांड में 15 युवकों व युवतियों की जान चली गई थी। अब इस अग्निकांड की जांच संबंधित सभी विभाग कर रहे हैं। इस अग्निकांड में विद्युत सुरक्षा विभाग ने आंतरिक जांच की, जिसमें पता चला कि भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला ने जो एनओसी हासिल की थी, वह फर्जी थी।\

नियम-कानून को ठेंगे पर रखने वाले अवैध व्यावसायिक भवन के मालिक वीरेंद्र शुक्ला ने विद्युत सुरक्षा की फर्जी एनओसी हासिल की थी। जांच पूरी होने के बाद विभाग के सहायक निदेशक ने भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ अलीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

विद्युत सुरक्षा निदेशालय में तैनात सहायक निदेशक आलोक शुक्ला के मुताबिक 22 जून को सेक्टर-डी के एमएस-102 भवन में हुए अग्निकांड की जांच के दौरान भवन की विद्युत सुरक्षा एनओसी का सत्यापन किया गया। जांच में पाया गया कि भवन स्वामी वीरेन्द्र प्रसाद शुक्ला ने जो एनओसी प्रस्तुत की है, विभागीय अभिलेखों से मेल नहीं खाती।

एनओसी पर अंकित पत्रांक और डिस्पैच संख्या विभाग के रिकार्ड में किसी अन्य विषय से संबंधित है। इसके अलावा तत्कालीन सहायक निदेशक के हस्ताक्षर, दस्तावेज का फान्ट, लिखावट और पेपर डिजाइन भी विभाग के मूल रिकार्ड से अलग पाए गए।
विभाग का आरोप है कि कूटरचना कर फर्जी एनओसी तैयार कराई गई और उसी के आधार पर बिजली निगम से विद्युत संयोजन ऊर्जीकृत करा लिया गया। सहायक निदेशक के मुताबिक फर्जी एनओसी वर्ष 2016 में जारी असली एनओसी की प्रति, डिस्पैच रजिस्टर की छाया प्रति, बिजली बिल व संबंधित अभिलेख पुलिस को उपलब्ध कराये गये हैं।

इंस्पेक्टर अलीगंज ध्रुव कुमार के मुताबिक सहायक निदेशक की तहरीर पर भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के खिलाफ कूटरचना, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज का प्रयोग करने की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

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