NOI ब्यूरो, लखनऊ। राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी ह्दयघात की आशंका वाले मरीजों को प्रथमिक उपचार दिया जाएगा।

इसके लिए 464 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। जिन जिला चिकित्सालयों में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध है, वहां बिस्तरों की संख्या बढ़ायी जाएगी। शेष में डायलिसिस यूनिट स्थापित होगी।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ( सीएमएस) निदेशकों से स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की समय से अस्पताल में उपस्थिति सुनिश्चित हो।

रात्रिकालीन राउंड नियमित हों। मरीजों की सेवाओं, स्टाफ उपस्थिति व व्यवस्थाओं की वरिष्ठ अधिकारी प्रभावी निरीक्षण करें। राज्य में गुर्दा रोगियों के बढ़ती संख्या और डायलिसिस यूनिटों में लंबी प्रतीक्षा सूची को देखते हुए उन्होंने बिस्तर बढ़ाने के साथ जिला चिकित्सालयों में इस सुविधा के विस्तार पर भी जोर दिया।

स्वास्थ्यकर्मियों को दी गई ट्रेनिंग

घोष ने कहा कि जिन चिकित्सालयों से प्रस्ताव आए हैं, उनका परीक्षण कर तेजी से कार्रवाई की जाए। सभी जिला चिकित्सालयों में हृदय रोग की विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध रहे। बताया गया कि हृदय रोग की त्वरित चिकित्सा के लिए प्रथम चरण में 75 जिलों के 464 सहायक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है।

अगस्त माह तक 2,54,384 हृदय के संभावित रोगियों की ईसीजी हुई। इसमें 3,631 में एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एसटीइएमआइ) पाई गई। इनमें से 2,179 को थ्रोम्बोलिसिस ( खून का थक्का तोड़ने की विधि) देकर ह्रदय रोग विशेषज्ञ केन्द्रों पर भेजा गया। घोष ने गोल्डन आवर में उपचार की नियमित मानीटरिंग के निर्देश दिए गए।

उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि एकीकृत सरकारी आन लाइन प्रशिक्षण कर्मयोगी (आइजीओटी) पोर्टल पर प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी पंजीकृत हों और अनिवार्य पाठ्यक्रम पूरे करें। हर माह 15 व 30 तारीख को प्रशिक्षण दिवस आयोजित किये जाएं।

फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थापना शीघ्र पूरी हो और लंबित फायर एनओसी का तत्काल निस्तारण कराया जाए। अग्निशमन विभाग के साथ समन्वय कर माक ड्रिल आयोजित किए जाएं। हर घर तिरंगा अभियान के तहत 13 से 15 अगस्त तक स्वास्थ्य संस्थानों में ध्वजारोहण और तिरंगे की रोशनी की व्यवस्था हो। इसकी सेल्फी पोर्टल पर अपलोड किया जाए।

संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शेष अवधि में फागिंग, एंटी-लार्वा और स्वच्छता गतिविधियां तेज की जाएं। मुख्यालय स्तर पर कंट्रोल रूम संचालित हो। डेंगू-मलेरिया की संभावित स्थिति देखते हुए अस्पतालों में लाजिस्टिक्स, दवाएं, आक्सीजन, एंबुलेंस और अतिरिक्त बेड पूरी तरह तैयार रखे जाएं। चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ का रिफ्रेशर प्रशिक्षण सुनिश्चित हो।

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