Rain Alert: जानें क्या है पॉकेट रेन? कानपुर में अलग-अलग हिस्सों में बारिश का अलग मिजाज, कई भारी तो कहीं बूंदाबांदी
NOI संवाददाता, कानपुर। शहर में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि एक मोहल्ले में कुछ ही मिनट में तेज वर्षा से सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, जबकि कुछ किलोमीटर दूर बूंद तक नहीं गिरती। स्थानीय स्तर पर कम क्षेत्र में होने वाली ऐसी तेज वर्षा को सामान्य तौर पर ‘पाकेट रेन’ कहा जाता है। इसके पीछे शहर की गर्म सतह, वातावरण में मौजूद नमी, हवा की दिशा और ऊपर उठती संवहन धाराओं का संयुक्त प्रभाव होता है। यही वजह है कि एक ही समय में शहर के अलग-अलग हिस्सों में वर्षा का मिजाज पूरी तरह अलग दिखाई देता है।
मौसम विशेषज्ञ डा. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि शहरों में कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और कम हरियाली दिनभर सूर्य की ऊर्जा सोखती हैं। ग्रामीण और खुले क्षेत्रों की तुलना में ये सतहें देर तक गर्म रहती हैं। इससे शहर के ऊपर अपेक्षाकृत गर्म हवा का क्षेत्र बनता है। गर्म और नम हवा तेजी से ऊपर उठती है। इसे संवहन कहा जाता है।
ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा ठंडी होती है और उसमें मौजूद जलवाष्प संघनित होकर बादल बनाने लगती है। वातावरण में नमी पर्याप्त हो तो बादल तेजी से ऊंचाई पकड़कर गरज-चमक वाले घने बादलों में बदल जाते हैं। हवा की ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज गति अनुकूल होने पर बादल एक सीमित क्षेत्र में सक्रिय रह सकते हैं और कुछ ही समय में वहां तेज वर्षा करा देते हैं।
डा. पांडेय ने बताया कि शहर की हवा में मौजूद धूल और सूक्ष्म कण बादल की बूंदों के बनने के लिए संघनन केंद्र की तरह काम कर सकते हैं। वहीं, ऊंची इमारतें और शहर की असमान सतह हवा के प्रवाह को प्रभावित करती हैं। इससे नमी और गर्म हवा का स्थानीय जमाव बढ़ सकता है और वर्षा का क्षेत्र सीमित रह सकता है।
शाम-रात में क्यों बढ़ता है असर
दिनभर गर्म हुई शहरी सतह शाम के बाद भी लंबे समय तक गर्मी छोड़ती रहती है। दूसरी ओर ऊपरी वातावरण तेजी से ठंडा होता है। जमीन के पास गर्म और नम हवा तथा ऊपर अपेक्षाकृत ठंडी हवा के बीच तापमान का अंतर वातावरण को अस्थिर कर सकता है। पर्याप्त नमी और ऊपर उठती हवा मिलने पर शाम से रात के बीच गरज-चमक वाले बादल विकसित हो सकते हैं। हालांकि पाकेट रेन केवल शाम या रात में ही हो, यह जरूरी नहीं है। स्थानीय तापमान, नमी, हवा, मानसून की स्थिति और पहले से मौजूद बादल इसके समय को प्रभावित करते हैं।
मौसम एप के लिए चुनौती
डा. पांडेय के मुताबिक मौसम एप बड़े पैमाने के मौसम माडल, रडार, उपग्रह और अन्य आंकड़ों के आधार पर पूर्वानुमान तैयार करते हैं। पॉकेट रेन का क्षेत्र कई बार इतना छोटा और उसका जीवनकाल इतना कम होता है कि कुछ किलोमीटर के अंतर पर बारिश की स्थिति बदल जाती है। ऐसे में छोटे बादल के अचानक बनने, तेजी से विकसित होने और कमजोर पड़ने का सटीक स्थान और समय पहले से बताना कठिन होता है। भारतीय मौसम विभाग स्थानीय गरज-चमक और भारी वर्षा के लिए नाउकास्ट व्यवस्था का इस्तेमाल करता है। रडार, उपग्रह और स्वचालित मौसम केंद्रों से मिलने वाले आंकड़ों से स्थानीय चेतावनी में सुधार हुआ है। इसके बावजूद छोटे पैमाने के संवहनी बादलों की सटीक भविष्यवाणी अब भी चुनौती बनी हुई है।
एप में वर्षा दिखे, फिर भी मोहल्ले में न हो
किसी मौसम एप पर पूरे शहर में वर्षा का संकेत दिखने का अर्थ यह नहीं है कि हर इलाके में एक समान वर्षा होगी। कुछ किलोमीटर दूर बादल बनकर 20 से 30 मिनट में तेज वर्षा करा सकता है, जबकि दूसरे क्षेत्र में आसमान साफ रह सकता है। इसलिए स्थानीय मौसम चेतावनी के लिए रडार आधारित नाउकास्ट और मौसम विभाग की जिला या स्टेशन स्तर की चेतावनियां अधिक उपयोगी होती हैं।
अगले 24 घंटे तेज वर्षा के आसार
कानपुर में रविवार भोर में तेज वर्षा हुई, जिससे उमस से लोगों को राहत मिली। इसके बाद भी आसमान में घने बादल छाए रहे और अगले 24 घंटे में तेज वर्षा के आसार बने हुए हैं। रविवार को अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.8 डिग्री कम था। न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री रहा। अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता 92 और न्यूनतम 80 प्रतिशत दर्ज हुई। हवा की औसत गति 2.8 और अधिकतम 6.1 किलोमीटर प्रति घंटा रही। उत्तर-पश्चिमी हवा के बीच 4.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
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