Sugar Price Hike: कानपुर में चीनी के थोक भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए हैं, जिससे खुदरा कीमतें भी बढ़ी हैं। कानपुर शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कालाबाजारी रोकने और प्रदेश में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।

NOI संवाददाता, कानपुर। त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में तेजी से आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। थोक बाजार शक्करपट्टी में चीनी का भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया है, जबकि फुटकर बाजार में कीमत 65 रुपये प्रति किलो तक हो गई है।

28 सितंबर को थोक भाव 5400 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच था । थोक कारोबारियों ने इस तेजी के पीछे कालाबाजारी और प्रदेश के बाहर अधिक भाव पर चीनी की बिक्री को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, कानपुर शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर प्रदेश में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बिक्री व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल किशन माहेश्वरी की ओर से 13 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए 14 लाख टन और दूसरे पखवाड़े के लिए 16 लाख टन चीनी का आवंटन किया है। संगठन के मुताबिक, यह अब तक का सर्वाधिक मासिक आवंटन है। इसके बावजूद प्रदेश में चीनी का बाजार में संकट है।

प्रदेश सरकार ने आम उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए नान रिफाइंड चीनी के मिल भाव 4500 और 4600 रुपये प्रति क्विंटल, जीएसटी अतिरिक्त, निर्धारित किए थे। हालांकि, प्रदेश के बाहर और बल्क कंज्यूमर्स को बिक्री के लिए मूल्य सीमा तय नहीं की गई।

एसोसिएशन का आरोप है कि इसी अंतर के कारण पहले पखवाड़े के आवंटन की लगभग 75 से 80 प्रतिशत चीनी मिलों ने प्रदेश के बाहर और बड़े खरीदारों को बेच दी। संगठन ने इस दावे की जीएसटी पोर्टल के माध्यम से जांच कराने की बात कही है।

थोक कारोबारियों के अनुसार, चीनी मिलों का भाव करीब 4600 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि उत्तर प्रदेश के बाहर के व्यापारियों को मिलों से लगभग 5000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चीनी बेची जा रही है। इसी कारण स्थानीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो रही है। 28 सितंबर को 5000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहने वाला थोक भाव अब 6000 रुपये के पार पहुंच चुका है।

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश के भीतर, दूसरे राज्यों और बल्क कंज्यूमर्स को चीनी बेचने के भाव में अंतर समाप्त किया जाए। साथ ही, पहले प्रदेश के आम उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराई जाए और दूसरे राज्यों में भेजी जाने वाली चीनी की मात्रा नियंत्रित की जाए।

पत्र में पड़ोसी राज्यों में चीनी के मिल भाव 5100 से 5400 रुपये प्रति क्विंटल तक होने का उल्लेख करते हुए प्रदेश में भी मूल्य निर्धारण की समीक्षा करने अथवा बाजार के अनुसार भाव तय करने का सुझाव दिया गया है।

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