NOI ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में डेटा आधारित सुशासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इंडियन स्कूल आफ बिज़नेस (आइएसबी) के भारती इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक पालिसी (बीआइपीपी) और उत्तराखंड सरकार के बीच बुधवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की मौजूदगी में प्रमुख सचिव योजना आर. मीनाक्षी सुंदरम और बीआइपीपी की निदेशक डॉ. आरुषि जैन ने समझौते का आदान-प्रदान किया।

इस साझेदारी के तहत बीआइपीपी, सेंटर फार पब्लिक पालिसी एंड गुड गवर्नेंस (सीपीपीजीजी) का शोध एवं ज्ञान साझेदार बनकर कार्य करेगा।

संस्थान राज्य सरकार को डेटा बैंक तैयार करने, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, निगरानी एवं मूल्यांकन, डेटा-लिंक्ड शासन, जलवायु अनुकूलता, वन अर्थव्यवस्था, क्षमता निर्माण, नेतृत्व विकास और अनुप्रयुक्त नीति अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग देगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य सरकार सभी विभागों में डेटा-संचालित शासन को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह सहयोग संस्थागत क्षमता बढ़ाने, डेटा के बेहतर उपयोग तथा नवाचारी नीतिगत समाधान विकसित करने में सहायक होगा, जिससे नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी और विकसित उत्तराखंड-2047 के लक्ष्य को गति मिलेगी।

एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम के साथ डेटा हार्मोनाइजेशन एवं डेटा-लिंक्ड गवर्नेंस सिस्टम निर्माण विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने प्रशासनिक डेटा प्रणालियों को मजबूत बनाने पर विचार साझा किए।

डॉ आरुषि जैन ने कहा कि उत्तराखंड में डेटा, तकनीक और मानवीय निर्णयों के समन्वय से ‘लर्निंग-इंटेलिजेंट गवर्नेंस’ का राष्ट्रीय माडल बनने की क्षमता है। कार्यशाला में एआइ आधारित पहलों, निगरानी एवं मूल्यांकन तथा विभागों के बीच डेटा एकीकरण पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

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