NOI ब्यूरो, लखनऊ। लखनऊ में पिछले सोमवार को कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना के बाद सभी जिलों में स्कूलों की अग्निसुरक्षा के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा।

मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति में एडीएम, पुलिस आयुक्त या एसएसपी द्वारा नामित पुलिस अधिकारी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, मुख्य कोषाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, राज्य आपदा मोचन बल द्वारा नामित अधिकारी के अलावा एनसीसी द्वारा नामित अधिकारी को समिति का सदस्य बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गठित की जाने वाली समिति अपने-अपने जिलों में 200-200 स्कूलों को चिह्नित करेगी।

इनमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन 100 विद्यालय, 60 निजी विद्यालय व 40 सरकारी व गैर सरकारी महाविद्यालय शामिल होंगे।

अग्निसुरक्षा को लेकर होगी जांच

चिह्नित स्कूलों में अग्निसुरक्षा के उपायों की जांच की जाएगी। विद्यार्थियों को अग्निसुरक्षा व आपदा से बचाव को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसके लिए राज्य आपदा मोचन बल, पीएसी, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निसुरक्षा विभाग, एनसीसी, एनएसएस, सीआइएसएफ, सिविल डिफेंस विभागों के साथ समन्वय बनाकर विद्यार्थियों को मास्टर ट्रेनर के जरिये प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

टीचरों के साथ स्टूडेंट को दी जाएगी ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस संदर्भ में जारी आदेश के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों व स्कूलों के स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे आपदा की स्थिति में सभी मिलकर सुरक्षा के उपायों पर काम कर सकें।

मास्टर ट्रेनर विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार, अग्निशमन यंत्रों का उपयोग, आपदा को लेकर विद्यालय या महाविद्यालय में सुरक्षित स्थल की पहचान, प्रवेश व निकासी की जानकारी देंगे।

साथ ही बाढ़, आंधी, तूफान व वज्रपात से बचाव की भी जानकारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हर जिले में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश आपदा प्राधिकरण ने दिए हैं। इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपी गई है।

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